फसल बीमा योजना: खरीफ 2026 के लिए सूरजपुर जिले में प्रक्रिया शुरू, 31 जुलाई अंतिम तिथि

Deshkibaat24
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सूरजपुर  : जिले में प्राकृतिक आपदाओं, प्रतिकूल मौसम और कीट प्रकोप से फसलों को होने वाले आर्थिक नुकसान से कृषकों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) खरीफ 2026 के तहत सूरजपुर जिले में व्यापक अभियान शुरू किया गया है। छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से भारतीय कृषि बीमा कंपनी (एआईसी) द्वारा प्रदेश के 10 चयनित जिलों में यह योजना प्रभावी रूप से लागू की जा रही है, जिसमें सूरजपुर जिला भी शामिल है। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग ने जिले के सभी ऋणी एवं अऋणी कृषकों से समय-सीमा के भीतर अपना नामांकन कराने का आग्रह किया है।
आर्थिक सुरक्षा का सशक्त माध्यम
सूरजपुर की कलेक्टर रेना जमील ने जिले के कृषकों से अपील करते हुए कहा कि फसल बीमा योजना कृषि क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन और आर्थिक स्थिरता का एक अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रतिकूल मौसम, ओलावृष्टि, जलभराव या अन्य अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल नष्ट होने की स्थिति में इस योजना के माध्यम से क्षतिपूर्ति संभव हो पाती है।
उन्होंने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि बीमा दावों के त्वरित, पारदर्शी और सुचारू भुगतान के लिए आधार प्रमाणीकरण (e-KYC) अनिवार्य कर दिया गया है। इसलिए सभी कृषक अपने संबंधित बैंक खातों में आधार नंबर को अद्यतन (Aadhaar Seeding) अवश्य करवा लें, ताकि भविष्य में दावा राशि के सीधे बैंक खाते में अंतरण (DBT) में किसी प्रकार का तकनीकी व्यवधान उत्पन्न न हो।
बीमित फसलें और प्रीमियम दरें
उप संचालक कृषि सम्पदा पैकरा ने योजना की तकनीकी और प्रशासनिक जानकारियाँ साझा करते हुए बताया कि जिले के लिए फसलों का निर्धारण दो प्रमुख प्रशासनिक स्तरों पर किया गया है:
ग्राम स्तर पर अधिसूचित फसलें: धान (सिंचित), धान (असिंचित), मक्का एवं सोयाबीन।
राजस्व निरीक्षक मंडल स्तर पर अधिसूचित फसलें: मूंगफली, तुअर (अरहर), मूंग, उड़द, कोदो, कुटकी एवं रागी।
योजना के तहत कृषकों के हित को ध्यान में रखते हुए प्रीमियम दर बेहद किफायती रखी गई है। बीमित राशि का मात्र 2 प्रतिशत प्रीमियम ही कृषकों द्वारा देय होगा। शेष 98 प्रतिशत प्रीमियम राशि का बहन केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से अनुदान के रूप में किया जाएगा।
क्षति की स्थिति में 72 घंटे का महत्वपूर्ण नियम
कृषि विभाग ने कृषकों को सचेत किया है कि फसल बुवाई के बाद स्थानीय आपदाओं (जैसे जलभराव, भूस्खलन, या ओलावृष्टि) अथवा फसल कटाई के उपरांत होने वाले नुकसान की स्थिति में 72 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य है। कृषक इसकी जानकारी निम्नलिखित माध्यमों से दर्ज करा सकते हैं:
टोल फ्री नंबर: 14447
अन्य संपर्क: संबंधित बैंक शाखा, नजदीकी लोक सेवा केंद्र (CSC), या कृषि/राजस्व विभाग का कार्यालय।
समय पर दी गई सूचना के आधार पर ही विभाग एवं बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों द्वारा मौके पर पहुँचकर नुकसान का सटीक आकलन किया जा सकेगा और समय पर दावा राशि स्वीकृत की जाएगी।
अऋणी कृषकों के लिए आवश्यक दस्तावेज
ऐसे कृषक जिन्होंने बैंक से फसल ऋण (KCC) नहीं लिया है, वे भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। वे अपने निकटतम बैंक शाखा, प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (PACS), लोक सेवा केंद्र (CSC), डाकघर या राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (PMFBY Portal) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित दस्तावेज आवश्यक हैं:
आधार कार्ड
भू-अभिलेख दस्तावेज (बी-1 एवं पी-2 / खसरा-खतौनी)
बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ की छायाप्रति
बुवाई प्रमाण-पत्र
सक्रिय मोबाइल नंबर
(आवश्यकतानुसार) बटाईदार/काश्तकार घोषणा पत्र अथवा केसीसी संबंधी स्व-घोषणा पत्र।
ऋणी कृषकों के लिए ‘ऑप्ट-आउट’ का प्रावधान
ऐसे ऋणी कृषक जिन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के माध्यम से ऋण लिया है, उनका बीमा बैंक द्वारा स्वतः कर दिया जाता है। यदि कोई ऋणी कृषक इस योजना में शामिल नहीं होना चाहता है, तो उसे निर्धारित कट-ऑफ तिथि (31 जुलाई 2026) से कम से कम 7 दिन पूर्व संबंधित बैंक शाखा में लिखित रूप से ‘Opting-Out Form’ जमा करना होगा। फॉर्म जमा न करने की स्थिति में बैंक खाते से प्रीमियम राशि स्वतः काट ली जाएगी।
नामांकन की अंतिम तिथि 31 जुलाई
कलेक्टर रेना जमील और उप संचालक कृषि सम्पदा पैकरा ने संयुक्त रूप से जिले के समस्त कृषकों से पुनः आग्रह किया है कि अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 का इंतजार किए बिना समय रहते अपना पंजीकरण पूर्ण करा लें, ताकि किसी भी अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदा की स्थिति में फसल क्षति से होने वाले आर्थिक नुकसान से सुरक्षा मिल सके।
अधिक जानकारी एवं सहायता के लिए संपर्क सूत्र:
टोल फ्री नंबर: 14447
व्हाट्सएप बॉट: 7065514447
आधिकारिक वेबसाइट: www.aicofindia.com
स्थानीय कार्यालय: नजदीकी कृषि अथवा राजस्व विभाग कार्यालय।

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