October 12, 2026
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सूरजपुर :  रामानुजनगर जिला प्रशासन के निर्देशन में जिले के विभिन्न विद्यालयों में पर्यावरण संरक्षण, हरियाली संवर्धन और विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने के उद्देश्य से नवाचारी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। इसी श्रृंखला में शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय पतरापाली में ईको क्लब के तत्वावधान में “सीड बॉल निर्माण एवं पर्यावरण संरक्षण” विषय पर एक विशेष गतिविधि का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला कलेक्टर के मार्गदर्शन तथा जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक (समग्र शिक्षा) और विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी के निर्देशन में संपन्न हुआ।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना और उन्हें प्रकृति के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाना था। गतिविधि के दौरान विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और रुचि के साथ मिट्टी, गोबर (कंपोस्ट) तथा विभिन्न प्रजातियों के बीजों के मिश्रण से सीड बॉल तैयार किए। इन सीड बॉलों के निर्माण में नीम, पीपल, कोसम, कचनार, कटहल, आम और इमली जैसी छायादार, फलदार तथा पर्यावरण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण वृक्षों के बीजों का उपयोग किया गया।
कार्यक्रम के दौरान ईको क्लब प्रभारी शिक्षक योगेश कुमार साहू ने विद्यार्थियों को सीड बॉल बनाने की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि सबसे पहले चिकनी मिट्टी और गोबर को समान मात्रा में मिलाकर, आवश्यकतानुसार पानी डालकर एक उपयुक्त मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके पश्चात मिट्टी की छोटी-छोटी गेंदें बनाकर उनके मध्य में एक या दो बीज रखे जाते हैं और उन्हें गोल आकार देकर छाया में सुखाया जाता है।
सीड बॉल तकनीक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए योगेश कुमार साहू ने बताया कि वर्षा ऋतु के दौरान इन तैयार सीड बॉल को बंजर भूमि, जंगलों, पहाड़ियों तथा अन्य खाली पड़े स्थानों पर फेंक दिया जाता है। मानसून की बारिश मिलते ही ये बीज स्वतः अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं। उन्होंने कहा कि यह तकनीक कम लागत में व्यापक स्तर पर पौधारोपण करने का एक अत्यंत प्रभावी और व्यावहारिक माध्यम है। इससे बीजों को प्रारंभिक अवस्था में पक्षियों और कीटों से सुरक्षा मिलती है, मिट्टी एवं जल का संरक्षण होता है, जैव विविधता में वृद्धि होती है और पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे आगामी वर्षा ऋतु में अधिक से अधिक सीड बॉल बनाकर प्रकृति को समर्पित करें, जिससे आने वाले वर्षों में हजारों नए पौधे विकसित होकर हरियाली का विस्तार कर सकें।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं दी गई, बल्कि जलवायु परिवर्तन, वनों के संरक्षण, जैव विविधता, जल एवं मिट्टी संरक्षण तथा वृक्षों के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। बच्चों ने पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए पूरी तत्परता से सीड बॉल बनाए और प्रकृति की रक्षा करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में शिक्षिका अनीता सिंह ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने विद्यार्थियों को सीड बॉल निर्माण तथा अन्य पर्यावरणीय गतिविधियों में निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया। इस दौरान प्रधानपाठक के. के. यादव, योगेश कुमार साहू, अनीता सिंह, रघुनाथ जायसवाल सहित विद्यालय के समस्त छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने मिलकर “हरित एवं स्वच्छ पर्यावरण के निर्माण” का सामूहिक संकल्प लिया। बच्चों ने अपने घर, गाँव और आसपास के क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा अन्य लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया।
विद्यालय परिवार का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधि-आधारित शिक्षण पद्धतियाँ विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति प्रेम, सामाजिक दायित्व, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में सहायक सिद्ध होती हैं। सीड बॉल निर्माण जैसी अभिनव पहल न केवल हरियाली बढ़ाने में योगदान देती है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, स्वस्थ और संतुलित पर्यावरण के निर्माण की दिशा में एक सशक्त कदम है।

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