October 13, 2026
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मोहिबुल हसन (लोलो)
सूरजपुर जिले के जनपद पंचायत भैयाथान के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सलका का पंचायत भवन पहली ही बारिश में बदहाली का शिकार हो गया है। भवन के भीतर और पूरे परिसर में जलभराव, कीचड़ और मलबा भर जाने से स्थिति बेहद नारकीय हो गई है। इस अव्यवस्था से नाराज होकर ग्राम पंचायत के सरपंच शिवकुमार अगरिया ने भवन में ताला जड़ दिया है। सरपंच का साफ कहना है कि जब तक जिला प्रशासन इस समस्या का ठोस समाधान नहीं निकालता और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं करता, तब तक पंचायत भवन का ताला नहीं खोला जाएगा।
अव्यवस्था के कारण आयुष्मान शिविर रद्द, सैकड़ों ग्रामीण परेशान
बारिश के पानी और मलबे के कारण ग्राम पंचायत का कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है। घटना के दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम आयुष्मान भारत योजना के तहत ग्रामीणों का कार्ड बनाने के लिए पंचायत भवन पहुंची थी। लेकिन कमरों में गंदा पानी और कीचड़ भरा होने के कारण स्वास्थ्य कर्मचारियों को बिना काम किए ही वापस लौटना पड़ा। वहीं, अपने जरूरी दस्तावेज लेकर घंटों इंतजार करने के बाद सैकड़ों ग्रामीणों को भारी निराशा के साथ वापस जाना पड़ा।
सीसी रोड बनने के बाद बिगड़े हालात, दबंगों पर पानी मोड़ने का आरोप
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत भवन के सामने हाल ही में सीसी रोड (कंक्रीट सड़क) का निर्माण कराया गया था। सड़क बनने के बाद आस-पास के कुछ रसूखदार लोगों ने अपने घरों और रास्तों का पानी व्यवस्थित करने के बजाय, उसका बहाव सीधे पंचायत भवन की तरफ मोड़ दिया। इसके चलते पहली ही बारिश का सारा पानी, कूड़ा-कचरा और मलबा पंचायत भवन के भीतर समा गया। स्थिति इतनी खराब है कि अब यह सरकारी भवन कम और कोई डबरी (छोटा तालाब) ज्यादा नजर आ रहा है।
इसके अलावा, भवन के ठीक सामने दो अवैध ठेले भी लगा दिए गए हैं, जिससे वहां लगातार गंदगी पसर रही है और शासकीय परिसर की सुंदरता पूरी तरह खराब हो चुकी है।
रीढ़ टूटी तो थमा विकास का पहिया
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत को लोकतंत्र और ग्रामीण विकास की रीढ़ की हड्डी माना जाता है। अगर पंचायत भवन ही इस तरह जलमग्न रहेगा, तो पूरे गांव के विकास का पहिया जाम होना तय है। वर्तमान में बारिश का सीजन शुरू ही हुआ है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर पानी की निकासी और परिसर की सफाई नहीं की गई, तो सरकार की तमाम जनकल्याणकारी योजनाएं कई महीने पीछे चली जाएंगी।
वर्तमान में स्थिति यह है कि पंचायत भवन के भीतर कंप्यूटर सिस्टम, आवश्यक शासकीय रिकॉर्ड और जरूरी फाइलें भीगने की कगार पर हैं। दफ्तर में बैठने की जगह न होने के कारण ग्रामीणों के प्रधानमंत्री आवास, वृद्धावस्था व सामाजिक सुरक्षा पेंशन, जाति-निवास प्रमाण पत्र और राजस्व से जुड़े सभी महत्वपूर्ण काम पूरी तरह बंद हो गए हैं।
सरपंच की चेतावनी: मांग पूरी न होने पर भूख हड़ताल की तैयारी
सरपंच शिवकुमार अगरिया ने इस मामले में बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। उन्होंने कहा, “जो लोग जानबूझकर अपने घरों का गंदा पानी पंचायत भवन की तरफ मोड़ रहे हैं, उनके खिलाफ मैं सीधे पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराऊंगा। पंचायत भवन की भूमि का यदि प्रशासन द्वारा सही तरीके से सीमांकन (नापी) करा दिया जाए, तो यहां अवैध कब्जा जमाए कई दबंगों के घर टूट जाएंगे। ग्रामीणों के हक और शासकीय संपत्ति की रक्षा के लिए यदि मुझे भूख हड़ताल पर भी बैठना पड़े, तो मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार हूं।” सरपंच ने जिला कलेक्टर और सीईओ से तत्काल जल निकासी व सफाई कराने की मांग की है।
जनपद सीईओ का बयान: ‘पंचायत अपने अधिकारों का उपयोग करे’
इस पूरे मामले पर जनपद पंचायत भैयाथान के सीईओ विनय कुमार गुप्ता ने प्रशासनिक पक्ष रखते हुए कहा कि ग्राम पंचायत के पास अपने दायरे में नाली निर्माण कराने और शासकीय भूमि का सीमांकन कराने के पूरे कानूनी अधिकार सुरक्षित हैं। पंचायत को किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपने अधिकारों का प्रयोग करना चाहिए और शासकीय कार्य में बाधा डालने वाले दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया है कि ग्राम पंचायत सलका को जल्द ही नया पंचायत भवन भी उपलब्ध करा दिया जाएगा।

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