
सूरजपुर : जिले में शिक्षा की अलख जगाने और ग्रामीण विकास को नई गति देने के लिए एक विशेष पहल की गई है। कलेक्टर रेना जमील के मार्गदर्शन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जिला पंचायत) के निर्देशन में जिले की ग्राम पंचायत में विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में पंचायत प्रतिनिधियों सहित भारी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए, जिनके बीच साक्षरता को लेकर अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। “उल्लास – नवभारत साक्षरता कार्यक्रम” के अंतर्गत आयोजित इस सभा में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और असाक्षरों ने मिलकर अपनी ग्राम पंचायत को पूर्ण रूप से साक्षर बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
सामूहिक सहभागिता से साक्षरता का संकल्प
इस विशेष अवसर पर ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, मेट, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, मितानिन, स्वास्थ्य कार्यकर्ता, स्कूल शिक्षक एवं उल्लास प्रभारी ने उपस्थित ग्रामीणों को साक्षरता की निष्ठापूर्वक शपथ दिलाई।
सभा को संबोधित करते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अशिक्षा और निरक्षरता ही ग्रामीण क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ी बाधक हैं। यदि हमें अपने गांव का सर्वांगीण और वास्तविक विकास करना है, तो पूरे गांव का शत-प्रतिशत साक्षर होना नितांत आवश्यक है। जब तक हर व्यक्ति अक्षरों की ताकत को नहीं समझेगा, तब तक विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ना संभव नहीं होगा।
डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचने की कवायद
ग्राम सभा के दौरान जागरूक ग्रामीणों ने एक बेहद समसामयिक और महत्वपूर्ण विषय पर ध्यान आकर्षित किया। ग्रामीणों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि आज के दौर में जिस तेजी से तकनीक बढ़ रही है, उसी गति से डिजिटल फ्रॉड और ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी बढ़ रहे हैं। इस प्रकार की ठगी का शिकार अधिकांशतः वही लोग होते हैं जिन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता। इसलिए, स्वयं को सुरक्षित रखने और ऑनलाइन बैंकिंग या मोबाइल के सही इस्तेमाल के लिए कम से कम अक्षरों और अंकों का बुनियादी ज्ञान होना बेहद जरूरी हो गया है।
आंकड़ों की समीक्षा और आगामी रणनीति
इस दौरान जनप्रतिनिधियों और महिला स्व-सहायता समूह (SHG) की सदस्यों ने साक्षरता अभियान से जुड़े आंकड़ों को साझा किया। उन्होंने बताया कि ‘उल्लास सर्वेक्षण’ के माध्यम से गांव में बचे हुए शेष असाक्षरों (निरक्षर लोगों) को पूरी तरह चिह्नित कर लिया गया है। रणनीति के तहत इन सभी शेष लोगों को उल्लास कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित होने वाली आगामी परीक्षा में सम्मिलित कराया जाएगा, ताकि वे इसे उत्तीर्ण कर पूर्ण साक्षर बन सकें। इस पूरी प्रक्रिया और उल्लास कार्यक्रम के वाचन में ब्लॉक परियोजना अधिकारी तथा स्वयंसेवकों ने सक्रिय और सराहनीय भूमिका निभाई।
जल संरक्षण, पर्यावरण और आवास योजना पर भी मंथन
यह ग्राम सभा केवल साक्षरता तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें गांव के समग्र विकास से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी मुहर लगी:
पेड़ लगाओ अभियान: गांव में जल स्तर को सुधारने और पर्यावरण को समृद्ध बनाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण करने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने पर सकारात्मक चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री आवास योजना: ग्रामीण विकास की इस महत्वाकांक्षी योजना के संबंध में विस्तृत समीक्षा की गई। सभा में सर्वसम्मति से सभी पात्र हितग्राहियों (Beneficiaries) की सूची को अंतिम रूप दिया गया और उसे आगे की त्वरित कार्रवाई के लिए उच्च कार्यालय को प्रेषित कर दिया गया।
बदलाव की बयार:
ग्राम सभा के समापन पर उपस्थित पंचगण और ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि समय की मांग के अनुरूप अब सभी को शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ना होगा। शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने ग्राम को आत्मनिर्भर और बेहतर बनाने का सबसे अचूक हथियार है। सूरजपुर की इस ग्राम सभा ने यह साबित कर दिया है कि जागरूकता और सामूहिक इच्छाशक्ति से किसी भी सामाजिक लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।