सूरजपुर : जिला संयुक्त कार्यालय में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला कलेक्टर रेना जमील ने की। इस महत्वपूर्ण बैठक में खनिज, वन, श्रम एवं उद्योग विभाग से संबंधित चालू योजनाओं और आगामी गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की गई और अधिकारियों को जमीनी स्तर पर परिणाम देने के आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
बैठक में सूरजपुर के डीएफओ, खनिज एवं श्रम विभाग के जिला स्तरीय अधिकारी, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (जीएमडीआईसी) के महाप्रबंधक सहित क्षेत्र की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों जैसे प्रकाश इंडस्ट्रीज, श्री सीमेंट और राजस्थान राज्य उत्पादन निगम लिमिटेड के प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कोयला खदानों के लंबित मामलों और मुआवजे पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश
बैठक के पहले चरण में एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के अंतर्गत संचालित कोयला खदानों से जुड़े विभिन्न संवेदनशील प्रकरणों पर गहन चर्चा की गई। कलेक्टर ने खदानों के संचालन में आ रही बाधाओं और लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन स्थानीय ग्रामीणों और किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है, उन्हें मुआवजे की राशि का भुगतान बिना किसी देरी के सुनिश्चित किया जाए। मुआवजा वितरण में पारदर्शिता बरतने और लंबित फाइलों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर करने के लिए कहा गया।
अवैध उत्खनन पर सख्त रुख और रेत भंडारण की समीक्षा
खनिज विभाग की समीक्षा के दौरान जिले में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर रेना जमील ने खनिज अधिकारी से जिले में चल रहे वैध रेत उत्खनन और रेत भंडारण (स्टॉक) की मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट ली।
इसके साथ ही, जिले में होने वाले अवैध उत्खनन के मामलों पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर पूरी तरह से रोक लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व, पुलिस और खनिज विभाग की संयुक्त टीम बनाकर अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इस दौरान वन विभाग से जुड़े पर्यावरण और अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जैसे लंबित मुद्दों पर भी समन्वय के साथ काम करने को कहा गया।
उद्योग और स्वरोजगार: फूड प्रोसेसिंग और महिला उद्यमिता पर फोकस
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक ने बैठक में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित रोजगारोन्मुखी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित योजनाओं की समीक्षा की गई:
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
पीएम फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेस (PMFME)
प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना
कलेक्टर ने जिले में कृषि और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता को देखते हुए नए उद्योगों की संभावनाओं पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सूरजपुर की स्थानीय फसलों और वनोपज को ध्यान में रखते हुए फूड प्रोसेसिंग (खाद्य प्रसंस्करण) इकाइयों की स्थापना के लिए एक विस्तृत और व्यावहारिक कार्ययोजना (Action Plan) तैयार की जाए। इसके साथ ही, महिला उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने के लिए दी जा रही ऋण और अन्य तकनीकी सुविधाओं की भी समीक्षा की गई, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।
श्रम कल्याण: विशेष पिछड़ी जनजातियों और महिलाओं का होगा शत-प्रतिशत पंजीयन
श्रम विभाग की समीक्षा करते हुए संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक कल्याण पर चर्चा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का दायरा बढ़ाने के लिए जिले के हर पात्र श्रमिक का पंजीयन अनिवार्य रूप से किया जाए।
पंडो समुदाय पर विशेष ध्यान: बैठक में निर्देश दिए गए कि विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति ‘पंडो समुदाय’ के श्रमिकों का शत-प्रतिशत (100%) पंजीयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें शासन की मुख्यधारा की योजनाओं से जोड़ा जा सके।
कम लिंगानुपात वाले क्षेत्रों में सक्रियता: जिन क्षेत्रों में लिंगानुपात कम है, वहां श्रम और महिला बाल विकास विभाग विशेष शिविर लगाकर महिलाओं को शासकीय योजनाओं से जोड़ेंगे।
मुख्यमंत्री सिलाई सहायता योजना में नया मॉडल: इस योजना के तहत अब पारंपरिक तरीके के बजाय क्लस्टर आधारित मॉडल विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) को जोड़कर हितग्राहियों को सीधे तौर पर लाभान्वित किया जाएगा।
कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन: इसके अलावा ‘दीदी ई-रिक्शा योजना’ और ‘नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना’ के प्रभावी संचालन की भी समीक्षा की गई, ताकि श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा और महिलाओं को रोजगार के बेहतर साधन मिल सकें।
अंतर्विभागीय समन्वय से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा लाभ
बैठक के समापन पर कलेक्टर रेना जमील ने सभी विभागीय अधिकारियों को नसीहत दी कि योजनाओं की सफलता केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी तालमेल (समन्वित प्रयासों) के साथ काम करने को कहा, जिससे जिले के दूरस्थ अंचलों में रहने वाले अंतिम पात्र व्यक्ति तक शासन की हर छोटी-बड़ी योजना का लाभ पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंच सके।
सूरजपुर में विकास कार्यों की समीक्षा: खनिज, उद्योग और श्रम विभाग की योजनाओं पर कलेक्टर ने दिए कड़े निर्देश
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