सूरजपुर में 15 नए सब-इंस्पेक्टर्स की थानों में व्यावहारिक ट्रेनिंग शुरू, एसएसपी ने जारी किया आदेश

Deshkibaat24
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सूरजपुर : जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग को मजबूत करने की दिशा में एक नया कदम उठाया गया है। जिले को 15 नए सब-इंस्पेक्टर (एसआई) मिले हैं, जिन्होंने अपनी बेसिक ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। अब इन सभी नव-नियुक्त अधिकारियों को फील्ड पर पुलिसिंग और कानून की बारीकियां सिखाने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण (प्रैक्टिकल ट्रेनिंग) के दौर से गुजारा जा रहा है। इसके तहत इन्हें जिले के विभिन्न शहरी और ग्रामीण थानों में तैनात किया गया है। डीआईजी और एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर ने इस संबंध में आधिकारिक पदस्थापना आदेश जारी कर दिए हैं।
व्यावहारिक अनुभव और पुलिसिंग की बारीकियों पर जोर
जारी आदेश के अनुसार, इस व्यावहारिक प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य नए सब-इंस्पेक्टर्स को किताबी और अकादमिक ज्ञान से आगे ले जाकर वास्तविक धरातल पर काम करने के योग्य बनाना है। थानों में तैनाती के दौरान ये अधिकारी कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराधों की जांच (इन्वेस्टिगेशन), फील्ड विज़िट, और आम जनता की समस्याओं के निवारण जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करेंगे।
इन नए अधिकारियों को थानों में पहले से पदस्थ अनुभवी पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में काम करने का अवसर मिलेगा। इससे वे पुलिस की कार्यप्रणाली, केस डायरी लिखना, अपराध अनुसंधान और जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने जैसी आवश्यक जिम्मेदारियों को गहराई से समझ सकेंगे।
थानों के अनुसार पदस्थापना का विवरण
प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इन 15 सब-इंस्पेक्टर्स को जिले के अलग-अलग थानों में विभाजित किया गया है। सबसे अधिक 4 एसआई की तैनाती जिला मुख्यालय के मुख्य थाना सूरजपुर में की गई है। थानों के अनुसार आवंटन इस प्रकार है:
थाना सूरजपुर: 4 सब-ईस्पेक्टर
थाना विश्रामपुर: 2 सब-ईस्पेक्टर
थाना जयनगर: 2 सब-ईस्पेक्टर
थाना भटगांव: 2 सब-ईस्पेक्टर
थाना प्रतापपुर: 2 सब-ईस्पेक्टर
थाना प्रेमनगर: 1 सब-ईस्पेक्टर
थाना झिलमिली: 1 सब-ईस्पेक्टर
थाना रामानुजनगर: 1 सब-ईस्पेक्टर
वरिष्ठ अधिकारियों का दृष्टिकोण:
पुलिस प्रशासन का मानना है कि इस व्यावहारिक ट्रेनिंग से नए अधिकारियों में न केवल पेशेवर दक्षता आएगी, बल्कि जनता के प्रति उनकी संवेदनशीलता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ये अधिकारी पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से थानों और चौकियों की कमान संभालने के लिए तैयार हो सकेंगे।

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