जमीरापाट बॉक्साइट खदान में बड़ा खुलासा: 12 करोड़ से अधिक मुआवजा राशि सरकारी खाते में जमा, फिर भी दाने-दाने को मोहताज किसान

Deshkibaat24
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कुसमी/बलरामपुर: छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम जमीरापाट में एक ऐसा प्रशासनिक मामला सामने आया है जो सरकारी कार्यप्रणाली की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्राम जमीरापाट में प्रस्तावित वृहद बॉक्साइट खदान परियोजना से प्रभावित गरीब और आदिवासी किसानों की फसलों व आजीविका की क्षति के एवज में 12 करोड़ 06 लाख 57 हजार 45 रुपये की भारी-भरकम राशि शासन के खाते में पिछले सात महीनों से जमा पड़ी है। इसके बावजूद, धरातल पर पीड़ित किसानों को फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं हुई है।
दूसरी तरफ, प्रशासन और खनन कंपनी की जुगलबंदी इतनी तीव्र है कि किसानों को मुआवजा दिए बिना ही खदान क्षेत्र तक पहुंच मार्ग (सड़क निर्माण) का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। आजीविका छिनने और मुआवजा न मिलने से आक्रोशित ग्रामीणों में भारी नाराजगी व्याप्त है और क्षेत्र में कभी भी बड़ा जन-आंदोलन भड़क सकता है।
50 वर्षों का पट्टा और कानूनी अनुबंध
प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के खनिज साधन विभाग ने ग्राम जमीरापाट स्थित 114.009 हेक्टेयर (लगभग 281 एकड़) के विशाल भूभाग में बॉक्साइट खनन के लिए छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) को 50 वर्षों की लंबी अवधि के लिए खनिज पट्टा स्वीकृत किया है। इस परियोजना को लेकर शासन और सरकारी उपक्रम सीएमडीसी के मध्य 15 मार्च 2024 को औपचारिक अनुबंध निष्पादित किया जा चुका है। यह क्षेत्र पूरी तरह से वन और कृषि संपदा से समृद्ध है, जिस पर सैकड़ों आदिवासी परिवार पीढ़ियों से आश्रित हैं।
सर्वेक्षण और मूल्यांकन में भारी मुआवजा तय
खनन पट्टा स्वीकृत होने के पश्चात, खनन क्षेत्र की सीमा में आने वाली निजी कृषि भूमि, वृक्षों एवं फसलों के नुकसान का सटीक आकलन कराने के लिए सीएमडीसी ने 15 जून 2022 को ही कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज को पत्राचार किया था। इसके आधार पर राजस्व और कृषि विभाग के संयुक्त दल ने प्रभावित क्षेत्र का विस्तृत भौतिक सर्वे किया। मूल्यांकन के पश्चात प्रशासन ने कुल फसल और भूमि क्षतिपूर्ति के रूप में 12.06 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की और 26 सितंबर 2024 को सीएमडीसी को औपचारिक डिमांड नोट जारी किया।
सात महीने से सरकारी खजाने में कैद है किसानों का पैसा
विश्वसनीय प्रशासनिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि सरकारी उपक्रम सीएमडीसी ने डिमांड नोट के पालन में निर्धारित पूरी राशि 12 करोड़ 06 लाख 57 हजार 45 रुपये दिनांक 3 नवंबर 2025 को ही कलेक्टर एवं भू-अर्जन अधिकारी के आधिकारिक बैंक खाते में पूर्ण रूप से जमा कर दी थी। जिला प्रशासन द्वारा इस राशि को वास्तविक हकदारों में वितरित करने के लिए फाइल अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कुसमी को अग्रसारित की गई थी। परंतु, अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि इस राशि को जमा हुए सात महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन कुसमी राजस्व अमले की लापरवाही के कारण अधिकांश प्रभावित किसानों के खातों में आज तक एक भी रुपया हस्तांतरित नहीं किया जा सका है।
अड़चन: फौती नामांतरण का बनाया जा रहा बहाना
राजस्व अधिकारियों द्वारा मुआवजा वितरण में हो रहे विलंब के पीछे ‘फौती नामांतरण’ (मूल भूस्वामी की मृत्यु के पश्चात कानूनी वारिसों के नाम दर्ज न होना) की सुस्त प्रक्रिया को मुख्य ढाल बनाया जा रहा है। जमीरापाट के हल्का पटवारी देवलाल एक्का ने भी इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि खनिज लीज क्षेत्र के 87 खसरों में से अनेक मामलों में फौती नामांतरण की प्रक्रिया वर्षों से लंबित है। राजस्व अभिलेखों में आवश्यक सुधार, वंशावली सत्यापन और उत्तराधिकार संबंधी कागजी जटिलताओं के कारण यह पूरी प्रक्रिया कछुआ गति से चल रही है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर जीवित वारिसों और गरीब किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
मुावजा शून्य, निर्माण कार्य पूर्ण गति में
एक तरफ जहां राजस्व विभाग सात महीनों में कागजी सुधार नहीं कर पाया, वहीं दूसरी तरफ औद्योगिक लॉबी को लाभ देने के लिए प्रशासनिक तत्परता देखने लायक है। तत्कालीन कलेक्टर द्वारा 23 मार्च 2026 को खदान क्षेत्र में ‘भू-प्रवेश’ (Land Possession) की सशर्त अनुमति जारी कर दी गई। इस अनुमति का सहारा लेकर खनन कार्य का मुख्य ठेका लेने वाली निजी कंपनी तेजस कार्गो इंडिया लिमिटेड, फरीदाबाद ने 28 मई 2026 को भारी सुरक्षा और तामझाम के साथ भूमि पूजन कर पहुंच मार्ग (सड़क निर्माण) का कार्य प्रारंभ कर दिया। जैसे ही भारी मशीनों ने किसानों के खेतों को रौंदना शुरू किया, ग्रामीण भड़क गए और मौके पर पहुंचकर तीव्र विरोध दर्ज कराया।
जिम्मेदार अधिकारी का गैर-जिम्मेदाराना वक्तव्य
इस अत्यंत संवेदनशील और विस्फोटक होती स्थिति पर जब सीएमडीसी नया रायपुर के महाप्रबंधक उपेंद्र कुमार पांडे से पक्ष लिया गया, तो उन्होंने मुआवजे के अभाव पर सीधा जवाब देने की बजाय कॉर्पोरेट भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि जमीरापाट बॉक्साइट खदान को प्रारंभ करने का अंतिम आदेश जारी हो चुका है और इस परियोजना के क्रियान्वयन से क्षेत्र में स्थानीय रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे तथा पूरे जिले के विकास को एक नई गति मिलेगी। हालांकि, महाप्रबंधक के इस कागजी दावे और जमीनी कड़वी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। रोजगार के सुनहरे सपनों के बीच वर्तमान में किसान अपनी खड़ी फसल और जमीन दोनों गंवाकर दाने-दाने को तरसने की स्थिति में आ गए हैं।
🚨 खोजी रिपोर्ट का असर: तत्काल अपेक्षित प्रशासनिक कार्यवाही
इस खोजी समाचार के प्रकाशन के उपरांत, छत्तीसगढ़ शासन, संभागायुक्त (सरगुजा) और जिला प्रशासन बलरामपुर द्वारा निम्नलिखित सख्त दंडात्मक एवं सुधारात्मक कदम उठाए जाने अनिवार्य हैं, अन्यथा यह मामला न्यायालयीन अवमानना और भारी जनाक्रोश का कारण बनेगा:
निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक  जब तक क्षेत्र के शत-प्रतिशत प्रभावित किसानों का मुआवजा वितरण पूर्ण नहीं हो जाता, तब तक कलेक्टर द्वारा 23 मार्च 2026 को जारी ‘भू-प्रवेश’ की अनुमति को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और तेजस कार्गो इंडिया लिमिटेड द्वारा किए जा रहे सड़क निर्माण को तुरंत रुकवाया जाए।
विशेष फास्ट-ट्रैक राजस्व शिविर का आयोजन: अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कुसमी को निर्देशित किया जाए कि वे अगले 7 दिनों के भीतर ग्राम जमीरापाट में ही ‘विशेष राजस्व शिविर’ लगाएं। इस शिविर में तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक (RI) और पटवारी देवलाल एक्का की मौजूदगी में सभी 87 खसरों के लंबित फौती नामांतरण और वारिस प्रमाण पत्रों का निपटारा मौके पर ही कर मुआवजा सीधे बैंक खातों में डाला जाए।
दोषी राजस्व अमले पर दंडात्मक विभागीय कार्यवाही: नवंबर 2025 से पूरी राशि खाते में उपलब्ध होने के बावजूद 7 महीनों तक फाइल दबाकर रखने वाले कुसमी राजस्व कार्यालय के संबंधित लिपिक (बाबू), प्रभारी अधिकारी और हल्का पटवारी के विरुद्ध ‘कर्तव्य में गंभीर लापरवाही’ तथा ‘जनहित के कार्यों को बाधित करने’ हेतु तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर विभागीय जांच शुरू की जाए।
मुआवजा वितरण में पारदर्शिता भ्रष्टाचार और बिचौलियों के खेल को समाप्त करने के लिए प्रभावित सभी किसानों के नाम, उनके खसरा नंबर और उनके हक की स्वीकृत मुआवजा राशि की पूरी सूची को तत्काल ग्राम पंचायत भवन जमीरापाट और कुसमी जनपद कार्यालय के सूचना पटल पर सार्वजनिक (चपका) किया जाए।

📌 जमीरापाट खदान खुलासा: मामले के मुख्य बिंदु
7 महीने से दबा है पैसा: सरकारी उपक्रम सीएमडीसी (CMDC) ने 3 नवंबर 2025 को ही मुआवजे की पूरी राशि कलेक्टर एवं भू-अर्जन अधिकारी के खाते में जमा कर दी थी, जो आज तक किसानों को नहीं मिली।
करोड़ों का मुआवजा लंबित: प्रभावित गरीब और आदिवासी किसानों की फसल व भूमि क्षति के एवज में कुल 12 करोड़ 06 लाख 57 हजार 45 रुपये की भारी-भरकम राशि सरकारी खजाने में कैद है।
50 वर्षों का पट्टा: ग्राम जमीरापाट के 114.009 हेक्टेयर (लगभग 281 एकड़) क्षेत्र को बॉक्साइट खनन के लिए 50 साल की लंबी अवधि के लिए लीज पर दिया गया है।
87 खसरों पर संकट: खनन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 87 राजस्व खसरों के सैकड़ों किसान इस प्रशासनिक लापरवाही से सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।
फौती नामांतरण का बहाना: हल्का पटवारी देवलाल एक्का के अनुसार, मूल भूस्वामियों की मृत्यु के बाद उनके कानूनी वारिसों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज न होने (फौती नामांतरण लंबित होने) के कारण भुगतान अटका है।
मुआवजा शून्य, काम चालू: राजस्व विभाग 7 महीने में कागजात दुरुस्त नहीं कर पाया, लेकिन प्रशासन ने 23 मार्च 2026 को ही खदान क्षेत्र में ‘भू-प्रवेश’ (कब्जे) की अनुमति जारी कर दी।
ग्रामीणों का तीखा विरोध: फरीदाबाद की ठेका कंपनी ‘तेजस कार्गो इंडिया लिमिटेड’ ने 28 मई 2026 को जैसे ही सड़क निर्माण शुरू किया, अपनी खड़ी फसलें उजड़ती देख ग्रामीणों ने काम रुकवाकर भारी विरोध प्रदर्शन किया।
कॉर्पोरेट राग: सीएमडीसी नया रायपुर के महाप्रबंधक उपेंद्र कुमार पांडे ने मुआवजे की लेटलतीफी पर सीधा जवाब देने के बजाय इसे ‘क्षेत्र के विकास और रोजगार’ से जुड़ी परियोजना बताया है।

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