सरकारी नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी: सूरजपुर न्यायालय ने आरोपी को सुनाई 3 वर्ष की कैद

Deshkibaat24
4 Min Read

सूरजपुर : सरकारी आबकारी विभाग में नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एक आरोपी को सूरजपुर की स्थानीय अदालत ने दोषी करार देते हुए जेल भेज दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सूरजपुर की अदालत ने मामले की पूरी सुनवाई के बाद आरोपी को 3 वर्ष के सश्रम कारावास और आर्थिक दंड की सजा सुनाई है। यह पूरा मामला साल 2018 का है, जिसमें पुलिस की पुख्ता विवेचना और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के चलते आरोपी को सजा दिलाने में सफलता मिली है।
क्या था पूरा मामला?
घटना की शुरुआत 10 जुलाई 2018 को हुई, जब पीड़ित अशोक दास ने सूरजपुर जिले के प्रेमनगर थाने में एक लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई। अशोक दास ने अपनी शिकायत में बताया कि चंदननगर (थाना प्रेमनगर) निवासी हेमंत महंत (पिता: सुन्दर दास सोनवानी) ने उससे आबकारी विभाग में भृत्य (चपरासी) के पद पर नौकरी लगवाने का वादा किया था।
नौकरी लगवाने के इस झांसे में आकर अशोक दास ने हेमंत महंत को 1 लाख रुपये की नगद राशि दे दी। रकम लेने के बाद आरोपी हेमंत महंत ने पीड़ित को बकायदा आबकारी विभाग का एक नियुक्ति आदेश (Appointment Letter) भी सौंप दिया।
विभाग पहुंचने पर खुला फर्जीवाड़े का राज
नियुक्ति पत्र मिलने के बाद जब पीड़ित अशोक दास संबंधित सरकारी विभाग के कार्यालय में अपनी जॉइनिंग और अन्य प्रक्रियाओं की जानकारी लेने पहुंचा, तो वहां के अधिकारियों ने उस पत्र को देखने के बाद साफ कर दिया कि आबकारी विभाग द्वारा ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। विभाग की जांच में वह नियुक्ति पत्र पूरी तरह से फर्जी और जाली पाया गया। खुद को ठगा हुआ महसूस करने के बाद पीड़ित ने तुरंत पुलिस की शरण ली।
पुलिसिया कार्रवाई और कोर्ट में चार्जशीट
अशोक दास की रिपोर्ट पर प्रेमनगर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अपराध क्रमांक 53/18 के तहत भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया। आरोपी हेमंत महंत के खिलाफ:
धारा 420 (धोखाधड़ी)
धारा 467 (मूल्यवान सुरक्षा, वसीयत आदि की जालसाजी)
धारा 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी)
धारा 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में उपयोग करना)
के तहत अपराध पंजीबद्ध कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। मामले की कमान विवेचक और निरीक्षक बसंत लाल सिंह ने संभाली। उन्होंने घटना से जुड़े सभी तकनीकी और भौतिक साक्ष्यों को बारीकी से संकलित किया और एक मजबूत आरोप पत्र (चार्जशीट) तैयार कर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी न्यायालय सूरजपुर के समक्ष प्रस्तुत किया।
अदालत का फैसला और सजा का एलान
इस हाई-प्रोफाइल मामले की अंतिम सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सूरजपुर की न्यायाधीश रुचि मिश्रा की अदालत में हुई। न्यायालय के समक्ष अभियोजन पक्ष की ओर से एडीपीओ राजेश सिंह और पंकज कुमार बागड़े ने पैरवी की। अभियोजन ने गवाहों और पुलिस द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों को इतनी मजबूती से कोर्ट के सामने रखा कि आरोपी का दोष पूरी तरह सिद्ध हो गया।
सभी पक्षों की दलीलों, गवाहों के बयानों और समग्र साक्ष्यों के गहन अध्ययन के बाद, न्यायाधीश रुचि मिश्रा ने 13 मई 2026 को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी हेमंत महंत को धारा 420 आईपीसी के तहत दोषी पाते हुए 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही आरोपी पर 500 रुपये का अर्थदंड (जुर्माना) भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने की स्थिति में आरोपी को अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

Share This Article
Leave a comment