विशेष खुलासा: बाजार में ‘शून्य’ है उन कागजों की कीमत, जिसे राजेश गुप्ता ‘मल्टीबैगर’ बता रहा है

Deshkibaat24
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चिरमिरी: इस पूरे घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू वे ‘शेयर बॉन्ड’ हैं, जिन्हें राजेश गुप्ता अपनी ठगी का हथियार बना रहा है। वित्तीय विशेषज्ञों ने जब इन दस्तावेजों की पड़ताल की, तो सच्चाई बेहद डरावनी निकली।
1. रद्दी के बराबर है कीमत:
राजेश गुप्ता जिन कंपनियों के शेयर्स का लालच दे रहा है, वे भारतीय शेयर बाजार (NSE/BSE) में लिस्टेड ही नहीं हैं। तकनीकी रूप से, जिन शेयर्स का बाजार में कोई खरीदार या विक्रेता नहीं है और जो किसी एक्सचेंज पर दर्ज नहीं हैं, उनकी कीमत ‘शून्य’ मानी जाती है। निवेशक जिसे करोड़ों की संपत्ति समझ रहे हैं, वह हकीकत में सिर्फ स्याही और कागज का एक टुकड़ा है।
2. डिजिटल युग में ‘कागजी बॉन्ड’ का खेल:
भारत में साल 1996 के बाद से शेयर्स का भौतिक (Physical) लेन-देन लगभग समाप्त हो चुका है। आज के दौर में शेयर DMAT अकाउंट में होते हैं। राजेश गुप्ता द्वारा बांटे जा रहे ये रंगीन प्रिंटेड ‘बॉन्ड पेपर’ पूरी तरह से फर्जी हैं। बिना ISIN (International Securities Identification Number) और बिना किसी अधिकृत डिपॉजिटरी (NSDL/CDSL) की मुहर के, इन कागजों की कानूनी हैसियत एक साधारण सादे कागज से ज्यादा कुछ नहीं है।
3. ‘मल्टीबैगर’ के नाम पर मानसिक गुलामी:
आरोपी ने निवेशकों को यह पट्टी पढ़ाई है कि 2026 तक इन शेयर्स की कीमत आसमान छुएगी। जानकारों का कहना है कि यह केवल लोगों को ‘मानसिक बंधक’ बनाने की चाल है। जब कोई कंपनी बाजार में लिस्ट ही नहीं है, तो उसकी कीमत बढ़ने का दावा करना वैसा ही है जैसे किसी काल्पनिक खजाने का नक्शा बेचना।
कटाक्ष: राजेश गुप्ता ने अपनी जालसाजी से निवेशकों को ‘कागजी महल’ का राजा बना दिया है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि जब इन कागजों को लेकर वे बाजार में निकलेंगे, तो उन्हें चवन्नी भी नसीब नहीं होगी। यह ‘भविष्य का निवेश’ नहीं, बल्कि ‘वर्तमान की डकैती’ है।
आर्टिकल के लिए एक तीखी हेडलाइन (विकल्प):
“करोड़ों का निवेश या रद्दी का ढेर? राजेश गुप्ता के ‘नकली बॉन्ड्स’ की पोल खुली!”
“शेयर बाजार में जिनका नाम नहीं, उनके नाम पर चिरमिरी में करोड़ों की ठगी; सावधान! ये बॉन्ड नहीं, बर्बादी का दस्तावेज है।”

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