
बलरामपुर _ जिले के विकासखण्ड राजपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत धंधापुर में जल संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए एक विशेष चौपाल का आयोजन किया गया। कलेक्टर राजेंद्र कटारा एवं जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर के मार्गदर्शन में संचालित “मोर गांव मोर पानी महाअभियान” के तहत ग्रामीणों को जल संचयन के साथ-साथ स्वरोजगार से जोड़ने की विस्तृत कार्ययोजना साझा की गई।
यह कार्यक्रम मनरेगा और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के साझा समन्वय से “नवा तरिया आय के जरिया” अभियान के अंतर्गत संपन्न हुआ।
जल संरक्षण के साथ बढ़ेंगे आय के स्रोत
चौपाल में उपस्थित ग्रामीणों और स्व-सहायता समूह की महिलाओं को संबोधित करते हुए बताया गया कि नया तालाब (नवा तरिया) केवल जल संचय का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आजीविका संवर्धन का एक बहुआयामी केंद्र है। अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण परिवार समूह आधारित गतिविधियों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकते हैं।
तालाब के माध्यम से आय अर्जन के प्रमुख तरीके साझा किए गए:
मत्स्य एवं बत्तख पालन: जल का उपयोग व्यावसायिक स्तर पर मछली पालन के लिए करना।
सिंघाड़ा उत्पादन: तालाब के पानी में सिंघाड़े की खेती कर अतिरिक्त लाभ कमाना।
तटवर्ती कृषि: तालाब की मेड़ पर मौसमी सब्जियां उगाना और फलदार वृक्षारोपण करना।
फसल चक्र में सुधार: खरीफ के बाद रबी और जायद फसलों के लिए सिंचाई की सुविधा मिलने से उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी।
मई माह तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य
कार्यक्रम के दौरान जनपद सीईओ संजय कुमार दुबे, जिला एपीओ संजय यादव, कार्यक्रम अधिकारी मानसाय सिदार, तकनीकी सहायक आशुतोष सहित एनआरएलएम और इंडियन ग्रामीण सर्विसेज की टीम ने प्रस्तावित निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। टीम ने ‘नवा तरिया’ के लिए उपयुक्त स्थान का चयन करते हुए निर्देश दिए कि निर्माण कार्य आगामी मई माह तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए, ताकि आने वाले मानसून का पूर्ण लाभ उठाया जा सके।
सामुदायिक सहभागिता पर जोर
अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि जब गांव का पानी गांव में ही रुकेगा, तभी भूजल रिचार्ज होगा और भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित होगी। “नवा तरिया” जैसी पहलें न केवल जल संकट का समाधान करती हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्वावलंबी बनाने में भी मील का पत्थर साबित होती हैं।

