सरगुजा: साइबर ठगी की रकम खपाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, गांधीनगर पुलिस ने 3 आरोपियों को किया गिरफ्तार

Deshkibaat24
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अम्बिकापुर जिला सरगुजा में साइबर अपराध और ठगी की रकम के हेरफेर के विरुद्ध पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश कुमार अग्रवाल के कड़े दिशा-निर्देशों के बाद थाना गांधीनगर पुलिस टीम ने ठगी की रकम का लेन-देन करने वाले और बैंक खातों की खरीद-बिक्री में शामिल तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने प्रार्थी के खाते का उपयोग कर हजारों रुपये का ट्रांजैक्शन किया था, जिसके बाद पुलिस ने मामले की तह तक जाकर इस गिरोह को पकड़ा।

*धोखाधड़ी की शुरुआत: दोस्त के विश्वास का फायदा उठाकर फंसाया*

मामले का विवरण प्रार्थी शौर्य प्रताप (निवासी हनुमान मंदिर के पास, गांधीनगर) की रिपोर्ट से सामने आया। शौर्य प्रताप ने 29 मार्च 2026 को थाना गांधीनगर में शिकायत दर्ज कराई कि उसका पुराना परिचित ऋत्विक सिंह (निवासी सब्जी मार्केट के पीछे, गांधीनगर) जो पहले दूध डेयरी और चाय दुकान चलाता था, उसके घर आया। दिसंबर 2024 में ऋत्विक सिंह ने शौर्य को झांसे में लिया और कहा कि उसका अपना बैंक खाता काम नहीं कर रहा है।
डेयरी का पैसा मंगाने के नाम पर उसने शौर्य के खाते में 48,500/- रुपये मंगवा लिए और उसका एटीएम लेकर पूरी रकम निकाल ली। इसके कुछ दिनों बाद जब शौर्य का बैंक खाता ‘होल्ड’ हो गया, तब उसे पता चला कि उसके खाते से साइबर ठगी का अवैध लेन-देन किया गया है। छानबीन में यह भी सामने आया कि ऋत्विक सिंह अपने दोस्त अमन गुप्ता के साथ मिलकर कई लोगों के खातों में इसी तरह पैसे मंगवाता था।

पुलिस की जांच और आरोपियों की धरपकड़
एसएसपी राजेश कुमार अग्रवाल ने मामले को संज्ञान में लेते हुए गांधीनगर पुलिस को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जांच के दौरान पुलिस ने जब ऑनलाइन पोर्टल पर खातों की डिटेल चेक की, तो पाया कि उन खातों पर पहले से ही साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज थीं। पुलिस ने संदिग्धों को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
ऋत्विक सिंह: आत्मज नरेंद्र कुमार सिंह, उम्र 25 वर्ष, निवासी गांधीनगर।
अमन कुमार गुप्ता: आत्मज स्व० चंद्रशेखर गुप्ता, उम्र 24 वर्ष, निवासी देवीगंज रोड, अंबिकापुर।
पीयूष तिवारी: आत्मज कृपा शंकर तिवारी, उम्र 25 वर्ष, निवासी सत्तीपारा, अंबिकापुर।

कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि वे एक बड़े गिरोह का हिस्सा हैं जो साइबर फ्रॉड की रकम को ठिकाने लगाने के लिए बैंक खातों की खरीद-बिक्री करते थे। ऋत्विक सिंह ने अपने तीन खाते, प्रार्थी का खाता और अमन गुप्ता ने अपना एक करंट अकाउंट मय सिम कार्ड के गिरोह के अन्य सदस्यों को दे रखा था।
वहीं तीसरे आरोपी पीयूष तिवारी के खाते में भी भारी मात्रा में ऑनलाइन फ्रॉड का पैसा ट्रांसफर होना पाया गया। पीयूष ने स्वीकार किया कि वह खातों में आई रकम को नकद निकालता था और फिर उसे सीडीएम (CDM) मशीन के माध्यम से अन्य खातों में ट्रांसफर कर देता था। आरोपियों के मोबाइल फोन से भारी मात्रा में बैंक ट्रांजैक्शन और ठगी से संबंधित डेटा बरामद किया गया है।

कानूनी कार्यवाही और टीम
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 3(5) और 317(4) के तहत अपराध दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए तीनों आरोपियों को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है। मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश सरगर्मी से की जा रही है।
इस पूरी कार्यवाही में थाना गांधीनगर के उप निरीक्षक दिलीप दुबे, साइबर सेल प्रभारी सहायक उप निरीक्षक अजीत मिश्रा, प्रधान आरक्षक जयदीप सिंह, विकास सिन्हा, और आरक्षक वीरेंद्र पैकरा, लालदेव, अशोक यादव, घनश्याम देवांगन, राहुल केरकेट्टा, अमन पुरी, विकास मिश्रा एवं रमेश राजवाड़े की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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