October 11, 2026
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अंबिकापुर : सरगुजा जिले में लोन दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक बड़े अंतर-जिला रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। गांधीनगर थाना पुलिस ने ‘अनशिवआर्या फाउण्डेशन ग्रुप कंपनी’ के मुख्य संचालक को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी ने एक शिक्षिका से 28 लाख रुपये की ठगी की थी, लेकिन पुलिसिया पूछताछ में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि वह अब तक 9 अन्य लोगों से भी लगभग 3 करोड़ रुपये से अधिक की महाठगी कर चुका है। यह पूरी कार्रवाई डीआईजी एवं एसएसपी राजेश कुमार अग्रवाल के दिशा-निर्देश पर की गई है।
शिक्षिका को जाल में फंसाकर की 28 लाख की ठगी
मामले का आधिकारिक खुलासा तब हुआ जब 12 मई 2026 को पीड़िता दिव्या एक्का (पति: पंकज लकड़ा), निवासी सरगवां, ने गांधीनगर थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। दिव्या एक्का राजपुर ब्लॉक में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं।
जुलाई 2024 में दिव्या एक्का जमीन खरीदकर घर बनवाने के लिए करीब 15 लाख रुपये का लोन लेने की योजना बना रही थीं। इसी दौरान उनके जीजा के माध्यम से एक अज्ञात बिचौलिये से उनका संपर्क हुआ, जिसने खुद को लोन एजेंट बताया था। उस व्यक्ति ने पीड़िता को भरोसा दिलाया कि अनशिवआर्या फाउण्डेशन ग्रुप कंपनी के संचालक शिवशंकर दास (निवासी: चंगोरी बरियों, जिला बलरामपुर) और उसके सहयोगियों की विभिन्न बैंकों में मजबूत पकड़ है और वे बेहद कम समय में लोन पास करवा देते हैं।
“60-40” की फर्जी स्कीम का दिया झांसा
पीड़िता का विश्वास जीतने के लिए आरोपी के साथी ने अपने मोबाइल और फिजिकल फाइलों के जरिए कई अन्य लोगों के लोन स्वीकृत होने के दस्तावेज दिखाए। जब पीड़िता को पूरी तरह भरोसा हो गया, तब आरोपी ने कंपनी की एक तथाकथित ‘स्पेशल स्कीम’ का झांसा दिया।
क्या थी फर्जी स्कीम?
आरोपी ने दावा किया कि बैंक से जितना भी लोन स्वीकृत होगा, उसका 60 प्रतिशत हिस्सा कंपनी के पास जमा रहेगा और 40 प्रतिशत हिस्सा पीड़िता को मिलेगा। सबसे बड़ा लालच यह दिया गया कि लोन की हर महीने की पूरी किश्त (EMI) खुद कंपनी चुकाएगी, ग्राहक को अपनी जेब से एक भी रुपया नहीं देना होगा।
इस आकर्षक झांसे में आकर दिव्या एक्का ने अपने अत्यंत गोपनीय दस्तावेज जैसे पैन कार्ड, आधार कार्ड, फॉर्म नंबर 16, सैलरी स्लिप और बैंक स्टेटमेंट व्हाट्सएप के माध्यम से आरोपी को सौंप दिए।
तीन अलग-अलग बैंकों से निकाला 41 लाख का लोन
आरोपी और उसके साथियों ने पीड़िता के दस्तावेजों का दुरुपयोग करते हुए उनके नाम पर मनमाने ढंग से तीन अलग-अलग प्रतिष्ठित बैंकों से कुल 41.08 लाख रुपये का लोन स्वीकृत करा लिया:
ICICI बैंक: 15 लाख रुपये
बैंक ऑफ इंडिया: 13.40 लाख रुपये
HDFC बैंक: 12.68 लाख रुपये
जैसे ही यह कुल राशि पीड़िता के बैंक खाते में ट्रांसफर हुई, आरोपी शिवशंकर दास और उसके साथियों ने उस पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। स्कीम के झांसे में आकर पीड़िता ने अलग-अलग किश्तों में कुल 28 लाख रुपये आरोपी द्वारा दिए गए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद जब कंपनी ने वादे के मुताबिक लोन की किश्तें जमा नहीं की और बैंकों से पीड़िता को नोटिस आने लगे, तब धोखाधड़ी का अहसास होने पर पीड़िता ने पुलिस की शरण ली।
क्रेसर कारोबार में घाटे की भरपाई के लिए बना ठग
गांधीनगर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत विवेचना शुरू की और आरोपी शिवशंकर दास को धारा 35(1)(बी),(2) बीएनएसएस (BNSS) के तहत नोटिस जारी किया। नोटिस की शर्तों का पालन न करने और टालमटोल करने पर पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर कड़े रुख से पूछताछ की।
पुलिसिया पूछताछ और मेमोरेण्डम कथन में आरोपी शिवशंकर दास ने अपना जुर्म पूरी तरह कबूल कर लिया। उसने खुलासा किया कि वह स्वयं का और किराए का क्रेसर (Crusher) संचालित करता है। क्रेसर व्यवसाय में भारी नुकसान होने के कारण वह पूरी तरह कर्ज में डूब गया था और उसे बाजार की देनदारी चुकाने के लिए मोटी रकम की जरूरत थी। इसी नुकसान की भरपाई के लिए उसने ‘अनशिवआर्या फाउण्डेशन’ के नाम पर यह फर्जीवाड़ा शुरू किया। पीड़िता से मिले 28 लाख रुपये में से उसने शुरुआती कुछ महीनों की किश्तें भरीं, ताकि किसी को शक न हो और गिरोह का काम चलता रहे, लेकिन बाद में पैसे खत्म होने पर उसने किश्तें देना बंद कर दिया।
3 करोड़ से अधिक का कुल आंकड़ा, आरोपी जेल रवाना
पुलिस जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि शिवशंकर दास और उसके साथियों ने इसी “60-40” स्कीम का झांसा देकर दिव्या एक्का के अलावा 09 अन्य सीधे-साधे लोगों से भी करीब 3 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की है। पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर पीड़ितों की संख्या और ठगी का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
अपराध स्वीकार किए जाने और पर्याप्त सबूत मिलने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी शिवशंकर दास (उम्र 40 वर्ष, पिता: राजू दास), निवासी: किशुनपुर, थाना धौरपुर, जिला सरगुजा को 27 मई 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
इस बड़े अंतर-जिला ठगी गिरोह का पर्दाफाश करने में गांधीनगर थाना प्रभारी और निरीक्षक प्रवीण कुमार द्विवेदी, सउनि अभिषेक दुबे, आरक्षक दीनदयाल सिंह और सुल्तान अहमद की मुख्य व महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस प्रशासन द्वारा इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की जा रही है। पुलिस अब इस मामले से जुड़े अन्य सह-आरोपियों, बिचौलियों और संदिग्ध बैंक खातों की कड़ियों को खंगाल रही है, जिससे इस महाघोटाले के बाकी किरदारों को भी सलाखों के पीछे भेजा जा सके।

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