सूरजपुर : जिला प्रशासन सूरजपुर द्वारा क्षेत्र के पर्यटन मानचित्र को वैश्विक स्तर पर चमकाने और स्थानीय आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक बड़ी पहल की गई है। कलेक्टर रेना जमील ने रविवार को जिले के विभिन्न महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्रों का सघन मैदानी दौरा किया। इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने न केवल विकास की संभावनाओं को टटोला, बल्कि वहां बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर मौके पर मौजूद अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। इस यात्रा का मुख्य आकर्षण पहाड़गांव पर्यटन स्थल रहा, जहां कलेक्टर ने प्रशासनिक औपचारिकताओं को छोड़ महिला स्व-सहायता समूह के सदस्यों के साथ स्वयं कठिन ट्रैकिंग मार्ग पर पैदल चलकर वास्तविक परिस्थितियों का जायजा लिया।
निरीक्षण की शुरुआत प्रसिद्ध केनापारा पर्यटन स्थल से हुई, जो अपने जलविहार आजीविका मॉडल के लिए जाना जाता है। यहां कलेक्टर रेना जमील ने स्थानीय महिला समूह से मुलाकात कर बोटिंग गतिविधियों और फ्लोटिंग रेस्टोरेंट के संचालन की विस्तृत समीक्षा की। परिसर में स्थापित ओपन जिम, आरामगाह (हट) और शेड का सूक्ष्मता से मुआयना करते हुए उन्होंने संसाधनों को सुव्यवस्थित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यटन तभी बढ़ेगा जब यहां आने वाले आगंतुकों को व्यवस्थित और सुरक्षित वातावरण मिले। इसी क्रम में उन्होंने परिसर की दुकानों की स्थिति सुधारने और उन्हें सुसज्जित कर नया रूप देने के निर्देश दिए।
पंडोपारा राष्ट्रपति भवन का ऐतिहासिक गौरव होगा संधारित
इसके पश्चात प्रशासनिक अमला पंडोपारा पहुंचा, जहां देश का ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण दूसरा ‘राष्ट्रपति भवन’ स्थित है। कलेक्टर ने इस गौरवशाली धरोहर का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने भवन परिसर में संजोकर रखी गई देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के वर्ष 1952 के पंडोपारा आगमन से जुड़ी ऐतिहासिक तस्वीरों और छायाचित्रों को देखा। इस दौरान वहां एक भावुक क्षण तब आया जब कलेक्टर ने इस ऐतिहासिक पल के साक्षी रहे बुजुर्ग बसंत पंडो से मुलाकात की। उन्होंने बसंत पंडो का आत्मीय सम्मान करते हुए उनसे डॉ. राजेंद्र प्रसाद की यात्रा से जुड़ी पुरानी स्मृतियों को सुना।
इसी बीच वहां उपस्थित रामचंद्र पंडो ने कलेक्टर को अपनी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में अवगत कराया। संवेदनशीलता दिखाते हुए रेना जमील ने तत्काल मौके पर ही स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को उनका उच्च स्तरीय और बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। ऐतिहासिक स्थल के महत्व को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और शोधार्थियों के लिए यहां की विशिष्ट जनजातीय जीवन शैली, संस्कृति तथा इतिहास को दर्शाती एक भव्य फोटो गैलरी विकसित की जाए और आगंतुकों के व्यवस्थित रिकॉर्ड के लिए नियमित विजिटर रजिस्टर (आगंतुक पंजी) का संधारण सुनिश्चित हो।
पहाड़गांव में महिला समूहों का हौसला बढ़ाया, ट्रैकिंग के लिए बनेंगे तीन श्रेणियां
प्रशासनिक दल ने इसके बाद प्राकृतिक वादियों से घिरे पहाड़गांव पर्यटन स्थल (पिलखा हिल्स) का रुख किया। कलेक्टर ने यहां मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित ‘पिलखा हिल्स कैफे’ का निरीक्षण किया और कैफे की आय व पर्यटकों की संख्या की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि इस स्थल की प्राकृतिक सुंदरता के कारण यहां सुदूर क्षेत्रों से लोग आते हैं। बरसात के दिनों में कीचड़ और जलभराव के कारण बोट तक पहुंचने में होने वाली दिक्कतों को देखते हुए समूह की महिलाओं ने सीढ़ी निर्माण की मांग रखी, जिसे कलेक्टर ने तुरंत मंजूरी देते हुए लोक निर्माण विभाग को कार्य शुरू कराने को कहा।
पर्यटन को एडवेंचर स्पोर्ट के रूप में बढ़ावा देने के लिए कलेक्टर ने ट्रैकिंग मार्ग का भी अवलोकन किया और खुद कुछ दूर पैदल चढ़ाई की। उन्होंने मुस्कान महिला स्व-सहायता समूह द्वारा संचालित कैफे का निरीक्षण करते हुए निर्देश दिए कि:
ट्रैक का वर्गीकरण: पर्यटकों की शारीरिक क्षमता और उम्र के आधार पर सरल, मध्यम और कठिन (Easy, Moderate, Difficult) श्रेणियों के तीन अलग-अलग ट्रैक विकसित किए जाएं।
पृथक मार्ग: चढ़ाई और उतराई के मार्ग पूरी तरह अलग-अलग रखे जाएं ताकि पर्यटकों को आवागमन में कोई असुविधा या दुर्घटना न हो।
पर्यावरण संरक्षण: बरसात में पहाड़ों की मिट्टी का कटाव रोकने के लिए सघन वृक्षारोपण किया जाए।
सौंदर्यीकरण और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर
कलेक्टर रेना जमील ने सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देते हुए जलाशय में बोटिंग के दौरान अनिवार्य रूप से सुरक्षा उपकरण (लाइफ जैकेट) उपयोग करने, पूरे परिसर में सूचना व चेतावनी पटल लगाने तथा सर्वोच्च स्तर की स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए बांध के निचले क्षेत्र का तकनीकी परीक्षण करवाकर वहां एक नए तालाब निर्माण की संभावनाओं को तलाशने की बात कही, जिससे न केवल जल संवर्धन होगा बल्कि क्षेत्र का सौंदर्य भी निखरेगा।
महिलाओं की आजीविका बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने पूरे ट्रैक और परिसर के आसपास नारियल के पौधों के रोपण की संभावना पर काम करने को कहा। उन्होंने कहा कि नारियल के पेड़ों से जहां एक ओर पर्यटन स्थल को एक आकर्षक लुक मिलेगा, वहीं स्थानीय महिला समूहों की आय में भी जबरदस्त वृद्धि होगी। साथ ही, उन्होंने पर्यटकों की सुविधाओं के लिए बन रहे सर्वसुविधायुक्त शौचालयों का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए।
पिलखा क्षीर को पुनर्जीवित करने की तैयारी
निरीक्षण के अंतिम पड़ाव में कलेक्टर ने सिलफिली स्थित बहुचर्चित ‘पिलखा क्षीर’ दुग्ध प्रसंस्करण केंद्र का दौरा किया। वर्तमान में बंद या धीमी पड़ी इसकी स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पिलखा क्षीर ब्रांड को बाजार में पुनः मजबूती से स्थापित करने के लिए एक ठोस व्यावसायिक और तकनीकी रणनीति (रोडमैप) तैयार की जाए। उन्होंने इसके संचालन को जल्द से जल्द पूरी क्षमता के साथ दोबारा शुरू करने की दिशा में तत्काल प्रभावी कदम उठाने को कहा, ताकि क्षेत्र के दुग्ध उत्पादकों और महिला समूहों को इसका सीधा आर्थिक लाभ मिलना शुरू हो सके।
पहाड़गांव में महिला समूहों के साथ पैदल चलीं कलेक्टर, ऐतिहासिक राष्ट्रपति भवन में जनजातीय संस्कृति गैलरी और सिलफिली में पिलखा क्षीर को पुनर्जीवित करने की बनी विस्तृत रणनीति।
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