छत्तीसगढ़ में खरीफ 2026 के लिए यूरिया वितरण के संशोधित दिशा-निर्देश जारी, पिछले वर्ष के रिकॉर्ड के आधार पर मिलेगी खाद

Deshkibaat24
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सूरजपुर : छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के लिए यूरिया उर्वरक के वितरण के संबंध में नए और संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन नए नियमों के तहत राज्य में सहकारी क्षेत्र (सोसायटियों) के माध्यम से यूरिया का वितरण पूरी तरह नियंत्रित और सुव्यवस्थित किया जाएगा। शासन का मुख्य उद्देश्य किसानों को सही समय पर खाद उपलब्ध कराना और कालाबाजारी या असंतुलित उपयोग को रोकना है, ताकि खेती-किसानी का काम बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके।
पिछले वर्ष (खरीफ 2025) का रिकॉर्ड बनेगा वितरण का आधार
नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, खरीफ वर्ष 2026 में किसानों को यूरिया उर्वरक का विक्रय उनके पिछले वर्ष (खरीफ 2025) में खरीदे गए यूरिया की मात्रा के आधार पर ही किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि पिछले साल किसान को जितनी यूरिया वितरित की गई थी, उसी पात्रता के अनुसार इस साल भी उन्हें खाद मिलेगी। यह व्यवस्था इसलिए लागू की जा रही है ताकि खाद का वितरण पारदर्शी हो और उसकी जमाखोरी न की जा सके।
स्टॉक कम होने पर भी सुरक्षित रहेगा किसानों का कोटा
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यूरिया का प्रदाय किसानों को एकमुश्त (एक बार में) या फिर संबंधित सहकारी समिति में उस समय उपलब्ध स्टॉक की मात्रा के आधार पर किश्तों में किया जाएगा।
यदि किसी सहकारी समिति में यूरिया की कमी या अल्प उपलब्धता होती है और कोई किसान अपनी तय पात्रता के अनुसार पूरी खाद एक बार में नहीं ले पाता है, तो उसका कोटा खत्म नहीं होगा। जैसे ही संबंधित समिति में यूरिया का नया स्टॉक पहुंचेगा, किसान अपनी शेष पात्र मात्रा वहां से दोबारा प्राप्त कर सकेगा। इस नियम से यह सुनिश्चित होगा कि हर पात्र किसान को उसकी जरूरत के मुताबिक खाद समय पर मिल सके और सोसायटियों में अनावश्यक भीड़ या असुविधा की स्थिति न बने।
कृषि विभाग की अपील: अंधाधुंध यूरिया के उपयोग से बचें
नए नियमों को जारी करने के साथ ही कृषि विभाग ने राज्य के किसानों से एक महत्वपूर्ण अपील भी की है। विभाग का कहना है कि किसान यूरिया का उपयोग अपनी फसलों की वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप ही करें। इसके लिए सबसे बेहतर तरीका वैज्ञानिक पद्धति और मृदा परीक्षण (Soil Test) को अपनाना है। मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर संतुलित खाद प्रबंधन करने से न केवल फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता में वृद्धि होती है, बल्कि खेती की लागत भी घटती है।
विज्ञप्ति में चेतावनी देते हुए बताया गया है कि यूरिया का असंतुलित और अत्यधिक उपयोग करने से जमीन की उर्वरा शक्ति (उपजाऊ क्षमता) पर बहुत बुरा असर पड़ता है। इसके साथ ही, जरूरत से ज्यादा खाद खरीदने पर किसानों का अनावश्यक आर्थिक व्यय भी बढ़ता है। इसलिए वैज्ञानिक तरीके से खाद डालना ही किसानों के आर्थिक और कृषि हित में है।
सहायता और जानकारी के लिए संपर्क सूत्र
कृषि विभाग ने कहा है कि यदि किसी भी किसान को अपने कोटे, पात्रता या यूरिया वितरण की प्रक्रिया के संबंध में कोई संदेह या समस्या है, तो वे सीधे मदद ले सकते हैं। इसके लिए किसान अपने निकटतम:
प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति (लोकल सोसाइटी)
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO)
क्षेत्र के कृषि विभाग के कार्यालय
में जाकर संपर्क कर सकते हैं, जहाँ उन्हें हर संभव तकनीकी जानकारी और सहायता प्रदान की जाएगी।

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