उद्यम पंजीयन तक सीमित न रहें, युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षण देकर वास्तविक उद्यमी बनाएं: कलेक्टर रेना जमील

Deshkibaat24
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सूरजपुर : जिले में स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता को गति देने के लिए कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए कलेक्टर रेना जमील ने उद्योग विभाग और जिले में सक्रिय विकास एजेंसियों के कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि रोजगार मूलक योजनाओं की सफलता केवल उद्यम पंजीयन के आंकड़ों से तय नहीं की जा सकती। युवाओं और महिलाओं को जब तक सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और बाजार की मांग के अनुरूप सहयोग नहीं मिलेगा, तब तक वे आत्मनिर्भर नहीं बन सकेंगे।
कलेक्टर ने जिले की भौगोलिक स्थिति और संसाधनों को ध्यान में रखते हुए बांस उद्योग, होम स्टे, माटीकला और वनांचल क्षेत्रों में विशेष तौर पर प्रशिक्षण गतिविधियों को तेज करने के निर्देश दिए हैं।
बांस उद्योग के लिए तैयार होगी ठोस कार्ययोजना
बैठक में सूरजपुर जिले में बांस की प्रचुर उपलब्धता पर विशेष चर्चा की गई। कलेक्टर ने कहा कि जिले में बांस आधारित लघु और कुटीर उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं। इस प्राकृतिक संसाधन का सही उपयोग कर स्थानीय लोगों के लिए आय के बड़े स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने उद्योग विभाग को पूरे जिले में एक व्यापक सर्वेक्षण करने और एक ठोस कार्ययोजना (Action Plan) तैयार करने को कहा। इसके साथ ही, स्थानीय कारीगरों को आधुनिक डिजाइन और तकनीकों से अवगत कराने के लिए मास्टर प्रशिक्षकों (Master Trainers) के माध्यम से उन्नत प्रशिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों में पहुंचेगा स्वरोजगार
जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों के विकास पर ध्यान केंद्रित करते हुए कलेक्टर ने ओड़गी विकासखंड का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भौगोलिक रूप से पिछड़े और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले युवाओं और महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए वहां स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इससे स्थानीय संसाधनों पर आधारित व्यवसायों को बल मिलेगा और ग्रामीणों को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा।
होम स्टे, कृषि और माइनिंग आधारित उद्योगों पर जोर
सूरजपुर जिले में पर्यटन और अन्य औद्योगिक संभावनाओं को रेखांकित करते हुए बैठक में ‘होम स्टे’ (Home Stay) संस्कृति को प्रोत्साहित करने की बात कही गई। इसके माध्यम से ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति से रूबरू होने का मौका मिलेगा और स्थानीय परिवारों की आय बढ़ेगी। इसके अलावा कलेक्टर ने जिले की मुख्य आर्थिक गतिविधियों जैसे कृषि, उद्यानिकी (Horticulture) और माइनिंग (खनन) आधारित क्षेत्रों में भी नई उद्यम इकाइयों के विकास की दिशा में तेजी से कार्य करने की आवश्यकता जताई।
तेलईकछार में मिट्टी के खिलौना निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
स्थानीय पारंपरिक कलाओं को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से कलेक्टर ने तेलईकछार में संचालित माटीकला बोर्ड के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पारंपरिक बर्तनों के साथ-साथ अब बाजार में मिट्टी के आधुनिक खिलौनों की मांग बढ़ रही है। इस क्षेत्र में स्थानीय कुम्हारों और कलाकारों को उन्नत व आधुनिक प्रशिक्षण (Advanced Training) दिलाया जाए, ताकि वे बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार कर सकें। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए और आकर्षक अवसर पैदा होंगे।
निष्कर्ष और भविष्य की दिशा
इस समीक्षा बैठक के माध्यम से सूरजपुर जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जिले में स्वरोजगार की योजनाओं को केवल लक्ष्य पूरा करने के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि एक स्थायी आर्थिक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। कलेक्टर रेना जमील के इन निर्देशों के बाद अब उद्योग विभाग और संबंधित एजेंसियां धरातल पर युवाओं और महिलाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नए सिरे से रणनीति तैयार करने में जुट गई हैं।

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