सूरजपुर : नगर पालिका परिषद, सूरजपुर ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के नियमों का उल्लंघन करने वाले डिफाल्टरों के खिलाफ बड़ी कार्यवाही शुरू कर दी है। परिषद द्वारा ऐसे हितग्राहियों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध रिवेन्यू रिकवरी सर्टिफिकेट (आरआरसी) यानी राजस्व वसूली प्रमाण-पत्र संबंधी नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिन्होंने वर्ष 2020 से पहले आवास स्वीकृत होने और शासन से निर्धारित राशि (किस्त) प्राप्त करने के बावजूद आज तक अपने मकान का निर्माण कार्य पूरा नहीं किया है।
इस कड़ी कार्यवाही के तहत नगर पालिका प्रशासन ने संबंधित हितग्राहियों को अंतिम अवसर देते हुए समय रहते अपना पक्ष प्रस्तुत करने अथवा निर्माण कार्य पूर्ण कराने की अपील की है।
निर्धारित समय-सीमा में पक्ष रखना अनिवार्य
नगर पालिका परिषद के आधिकारिक आदेशानुसार, जिन भी हितग्राहियों को यह रिकवरी नोटिस प्राप्त हुआ है, उन्हें एक निश्चित समय-सीमा दी गई है। इस तय अवधि के भीतर संबंधित व्यक्तियों को नगर पालिका कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा अथवा मकान निर्माण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज परिषद के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। यदि हितग्राही किसी तकनीकी या व्यावहारिक कारण से निर्माण पूर्ण नहीं कर पाया है, तो उसे इसका वैध प्रमाण देना होगा।
लापरवाही बरतने पर होगी सरकारी राशि की वसूली
शासन के प्रचलित नियमों का हवाला देते हुए नगर पालिका परिषद ने स्पष्ट किया है कि योजना के अंतर्गत मिली राशि का उपयोग केवल और केवल आवास निर्माण के लिए ही किया जाना था। तय समय-सीमा के भीतर यदि कोई हितग्राही अपना पक्ष नहीं रखता है या निर्माण कार्य पूरा करने में रुचि नहीं दिखाता है, तो इसे सरकारी धन का दुरुपयोग माना जाएगा। ऐसी स्थिति में प्रशासन द्वारा सख्त कदम उठाते हुए प्रदत्त राशि की शत-प्रतिशत वसूली के लिए आरआरसी (राजस्व वसूली) की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी, जिसके तहत कुर्की या अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।
निकाय प्रशासन की अपील: अनावश्यक कार्यवाही से बचें
नगर पालिका परिषद, सूरजपुर ने सभी संबंधित हितग्राहियों से आग्रह किया है कि वे इस मामले की गंभीरता को समझें और समय रहते आवश्यक पहल करें। परिषद ने कहा कि योजना के नियमों का पालन करना और प्राप्त राशि से आवास पूर्ण करना प्रत्येक हितग्राही का नैतिक और कानूनी दायित्व है। हितग्राही जल्द से जल्द निकाय प्रशासन से संपर्क कर अपेक्षित सहयोग प्रदान करें, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की अप्रिय या दंडात्मक वसूली प्रक्रिया का सामना न करना पड़े।