
अंबिकापुर : जिला सरगुजा में गुम हुए मोबाइल फोनों को खोजने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। साइबर सेल अंबिकापुर और जिले के समस्त थाना व चौकी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पिछले 5 महीनों के भीतर कुल 129 गुम मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। बरामद किए गए इन मोबाइलों की कुल कीमत लगभग 31 लाख रुपये आंकी गई है।
पुलिस लाइन स्थित सभागार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इन सभी मोबाइलों को उनके असल मालिकों को वापस सौंपा गया। अपने खोए हुए मोबाइल दोबारा पाकर नागरिकों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने पुलिस टीम के प्रयासों की जमकर सराहना की।
तकनीकी सर्विलांस से मिली सफलता
जिले के विभिन्न थानों और चौकियों में लगातार मोबाइल गुम होने की शिकायतें मिल रही थीं। इन आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा राजेश कुमार अग्रवाल के दिशा-निर्देशन में एक विशेष खोज अभियान शुरू किया गया था।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमोलक सिंह ढिल्लों और नगर पुलिस अधीक्षक राहुल बंसल के नेतृत्व में पुलिस टीमों ने अत्याधुनिक सर्विलांस तकनीक और डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर इन मोबाइलों को ट्रैक किया। गौरतलब है कि इससे पूर्व फरवरी 2026 में भी सरगुजा पुलिस ने एक बड़ा अभियान चलाकर 525 गुम मोबाइल बरामद कर नागरिकों को सौंपे थे।
साइबर फ्रॉड से बचने के लिए दिया ‘POLICE’ मंत्र
कार्यक्रम के दौरान राजेश कुमार अग्रवाल ने मोबाइल धारकों को संबोधित करते हुए सचेत रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मोबाइल में नागरिकों की कई बेहद गोपनीय और महत्वपूर्ण जानकारियां होती हैं, जिनका गलत इस्तेमाल कर साइबर ठग वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं। उन्होंने साइबर अपराधों से सुरक्षा के लिए ‘POLICE’ की-वर्ड का फॉर्मूला समझाया:
P (पासवर्ड): अपने ईमेल, सोशल मीडिया और बैंकिंग ऐप्स के पासवर्ड मजबूत रखें और इन्हें किसी के साथ साझा न करें।
O (ओटीपी): फोन या ईमेल पर आने वाला ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) कभी भी किसी अज्ञात व्यक्ति या खुद को बैंक कर्मचारी बताने वाले को न दें।
L (लिंक): एसएमएस या ईमेल पर आने वाले किसी भी संदिग्ध या अनजान लिंक पर क्लिक न करें। ये नकली वेबसाइटों पर ले जाकर डेटा चोरी कर सकते हैं।
I (आइडेंटिफिकेशन): अपने निजी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड संभालकर रखें। सोशल मीडिया पर इन्हें पोस्ट न करें और फोटोकॉपी दुकानों पर मूल प्रति या छायाप्रति न छोड़ें।
C (केयरफुल): साइबर जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। सोशल मीडिया पर अपनी वास्तविक स्थिति या ज्यादा व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचें और किसी भी तरह के लालच में न आएं।
E (इमर्जेंसी): यदि कोई ऑनलाइन या बैंकिंग धोखाधड़ी होती है, तो तुरंत टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या नजदीकी थाने/साइबर सेल से संपर्क करें।
शासकीय योजनाओं और हेल्पलाइन की जानकारी
पुलिस प्रशासन द्वारा इस दौरान नागरिकों के हित में चलाई जा रही दो अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी दी गई:
राहवीर योजना: सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले मददगार नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए शासन द्वारा 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह नकद राशि घायल को अस्पताल पहुंचाने के 1 महीने के भीतर सहायता करने वाले व्यक्ति को प्रदान की जाती है।
अवैध प्रवासियों की सूचना: जिले में किसी भी अवैध प्रवासी की उपस्थिति का संदेह होने पर नागरिक टोल-फ्री नंबर 18002331905, पुलिस हेल्पलाइन 9479193599 अथवा डायल 112 पर सूचना दे सकते हैं। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी।
बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से गायब हुए थे फोन
अधिकतर मोबाइल फोन बाजार, सब्जी मंडी, चौक-चौराहों, यात्रा के दौरान और मंदिरों के आसपास से गुम हुए थे। पीड़ितों ने इसकी शिकायत थानों के अलावा भारत सरकार के ऑनलाइन पोर्टल CEIR पर दर्ज कराई थी। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अपने मोबाइल का विशेष ध्यान रखें और फोन गुम होने की स्थिति में तुरंत थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद https://www.ceir.gov.in पोर्टल पर इसे ब्लॉक व ट्रैक करने के लिए अनिवार्य रूप से दर्ज करें।
इन अधिकारियों व कर्मचारियों की रही सराहनीय भूमिका
इस पूरे अभियान और वितरण कार्यक्रम को सफल बनाने में अमोलक सिंह ढिल्लों (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक), तुल सिंह पट्टावी (अनुविभागीय अधिकारी पुलिस ग्रामीण), तृप्ति सिंह राजपूत (रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर), शशिकान्त सिन्हा (थाना प्रभारी कोतवाली), प्रवीण कुमार द्विवेदी (थाना प्रभारी गांधीनगर) और साइबर सेल प्रभारी अजीत मिश्रा की मुख्य भूमिका रही। इसके साथ ही तकनीकी ट्रैकिंग और व्यवस्था में आरक्षक अनुज जायसवाल, अमित विश्वकर्मा, रिंकू गुप्ता, अशोक यादव, वीरेंद्र पैकरा, उमाशंकर साहू, रमेश राजवाड़े और राहुल केरकेट्टा सक्रिय रूप से शामिल रहे।