भैयाथान में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 316 गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच, 26 हाई रिस्क केस चिह्नित

Deshkibaat24
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सूरजपुर :  जिले के भैयाथान विकासखंड में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत एक विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। कलेक्टर रेना जमील के दिशा-निर्देशों एवं मार्गदर्शन में आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण व दूर-दराज के क्षेत्रों की गर्भवती माताओं को गुणवत्तापूर्ण और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। शिविर के दौरान कुल 316 गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें आवश्यक परामर्श और चिकित्सीय सहायता दी गई।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सोनोग्राफी और पैथोलॉजी जांच
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भैयाथान में आयोजित इस शिविर में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम द्वारा महिलाओं के हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, शुगर सहित विभिन्न आवश्यक परीक्षण किए गए। जांच के दौरान जिन महिलाओं को विस्तृत परीक्षण की आवश्यकता महसूस हुई, उनमें से 38 गर्भवती माताओं की नि:शुल्क सोनोग्राफी कराई गई। इससे गर्भस्थ शिशु के विकास और स्वास्थ्य की स्थिति का सटीक आकलन करने में मदद मिली।
26 हाई रिस्क प्रेगनेंसी की पहचान और विशेष निगरानी
सघन स्वास्थ्य जांच के दौरान 26 गर्भवती माताओं में जटिलताएं पाई गईं, जिन्हें ‘हाई रिस्क प्रेगनेंसी’ (एचआरपी) के रूप में चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर पंजीकृत किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन महिलाओं के लिए विशेष देखभाल योजना तैयार की गई है:
निरंतर चिकित्सीय निगरानी: इन सभी 26 महिलाओं को विशेषज्ञ डॉक्टरों की सीधी देखरेख में रखा जाएगा।
नि:शुल्क उपचार एवं दवाएं: आवश्यकतानुसार दवाएं, पोषण संबंधी गाइडलाइंस और नियमित फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाएगा।
सुरक्षित प्रसव की तैयारी: जोखिम वाले मामलों में संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव के लिए अग्रिम योजना बनाई गई है।
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने का प्रयास
कलेक्टर रेना जमील की पहल पर जिले भर में चलाए जा रहे इस अभियान के माध्यम से गर्भावस्था के दौरान संभावित जोखिमों की समय रहते पहचान की जा रही है। शिविर में उपस्थित चिकित्सकों ने महिलाओं को संतुलित आहार, आयरन-फॉलिक एसिड की गोलियों के सेवन और संस्थागत प्रसव के लाभों के बारे में जागरूक किया। इस प्रकार की नियमित जांच और फॉलो-अप से जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम करने में बड़ी सफलता मिल रही है।

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