पत्नी की हत्या के आरोपी पति को आजीवन कारावास, मिट्टी लीपने से मना करने पर डंडे से मारकर ली थी जान

Deshkibaat24
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सुरजपुर : जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) सूरजपुर ने पत्नी की हत्या के मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए आरोपी पति को दोषी ठहराया है। न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास और 1,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
क्या था पूरा मामला?
घटना 14 अप्रैल 2023 की शाम प्रेमनगर थाना क्षेत्र के ग्राम केदारपुर की है। गांव के निवासी मंगल साय ने 15 अप्रैल 2023 को प्रेमनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उनका चचेरा भाई बुधवार साय अपने घर के बगल में मिट्टी का नया मकान बना रहा था। पहली पत्नी के निधन के बाद उसने समुन्द्री बाई से दूसरी शादी की थी और उसी के साथ मिलकर मकान का निर्माण कर रहा था।
14 अप्रैल की शाम बुधवार साय और उसकी पत्नी समुन्द्री बाई के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद के दौरान आरोपी अपनी पत्नी के साथ मारपीट करने लगा। समुन्द्री बाई के चिल्लाने पर मंगल साय और उनका छोटा भाई मौके पर पहुंचे, लेकिन डर के कारण बीच-बचाव करने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
कुछ देर बाद बुधवार साय ने स्वयं आकर मंगल साय को बताया कि उसने समुन्द्री बाई को मकान में मिट्टी लमरने (लीपने) के लिए कहा था। जब समुन्द्री बाई ने काम करने से मना कर दिया, तो गुस्से में आकर उसने डंडे से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी।
पुलिस जांच और कार्रवाई
प्रार्थी मंगल साय की रिपोर्ट पर प्रेमनगर पुलिस ने अपराध क्रमांक 37/2023 के तहत धारा 302 (हत्या) का मामला दर्ज किया। तत्कालीन थाना प्रभारी प्रेमनगर निरीक्षक रूपेश कुंतल ने मामले की विवेचना की।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी बुधवार साय (पिता सुखलाल धनुहार, उम्र 35 वर्ष, निवासी केदारपुर) को गिरफ्तार किया। विवेचना के दौरान आरोपी के खिलाफ पुख्ता और ठोस साक्ष्य जुटाए गए, जिसके बाद पुलिस ने फास्ट ट्रैक कोर्ट सूरजपुर में चालान प्रस्तुत किया।
न्यायालय का फैसला
मामले की सुनवाई जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) सूरजपुर के न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल की अदालत में हुई। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक नरेश कुमार कौशिक ने पैरवी की और अदालत के समक्ष मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए।
न्यायालय ने प्रस्तुत गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर बुधवार साय को धारा 302 भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या का दोषी पाया। अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास तथा 1,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

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