
अंबिकापुर : सरगुजा आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से सरगुजा पुलिस ने ‘नेक्स्ट-जेन डायल 112’ की एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की। रक्षित केंद्र अंबिकापुर के सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में पुलिस अधिकारियों, मैदानी कर्मचारियों, साइबर विशेषज्ञों और डायल 112 के वाहन चालकों को कई अहम निर्देश दिए गए। बैठक में मुख्य रूप से आपातकालीन स्थिति में रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम करने और आम जनता के साथ साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी साझा करने पर बल दिया गया।
त्वरित रिस्पॉन्स टाइम पर सख्त हिदायत
बैठक में आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की गई। नोडल अधिकारी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा, रितेश चौधरी ने स्पष्ट किया कि डायल 112 संकट के समय आम नागरिकों का सबसे बड़ा सहारा है। उन्होंने मैदानी स्टाफ और ईआरयू (इमरजेंसी रिस्पॉन्स यूनिट) को निर्देश दिया कि किसी भी घटना या शिकायत की सूचना मिलते ही टीम तुरंत मौके के लिए रवाना हो।
इवेंट का त्वरित निराकरण करने के बाद वाहनों को बिना किसी देरी के अपने निर्धारित ‘फिक्स पॉइंट’ पर वापस लौटने के सख्त निर्देश दिए गए। वाहनों की अनावश्यक आवाजाही या कार्य में लापरवाही पाए जाने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही लोकेशन ट्रैकिंग, जीपीएस और कंट्रोल रूम के समन्वय को मजबूत रखने के लिए तकनीकी टीम को भी 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है।
उत्कृष्ट कार्य करने वालों को मिलेगा पुरस्कार
जमीन पर मुस्तैदी से काम कर रहे अधिकारी-कर्मचारियों और चालकों के प्रयासों की सराहना करते हुए नोडल अधिकारी ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी 112 की टीम बेहतर काम कर रही है। उत्कृष्ट और समयबद्ध सेवाएं देने वाले पुलिसकर्मियों एवं चालकों को प्रोत्साहित करने के लिए इनाम देने की अनुशंसा भी की गई है।
फील्ड स्टाफ को साइबर जागृति अभियान से जोड़ा गया
बैठक के दूसरे सत्र में पुलिसकर्मियों को साइबर सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया गया। साइबर सेल में पदस्थ आरक्षक अनुज जायसवाल और आरक्षक वीरेन्द्र पैकरा ने छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा चलाए जा रहे ‘साइबर जागृति अभियान’ के तहत विस्तृत जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने वर्तमान समय में बढ़ रहे साइबर अपराधों जैसे:
ओटीपी (OTP) फ्रॉड
फर्जी लोन ऐप स्कैम
सोशल मीडिया हैकिंग
संदिग्ध लिंक्स
डिजिटल अरेस्ट
के तरीकों और बचाव के उपायों के बारे में बताया। चूंकि डायल 112 की टीम किसी भी घटना के समय सीधे जनता से जुड़ती है, इसलिए फील्ड में तैनात अधिकारियों, कर्मचारियों और चालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आम नागरिकों को भी साइबर ठगी के प्रति जागरूक करें। नागरिकों को समझाया जाए कि वे किसी से भी अपना बैंक विवरण या personal OTP साझा न करें। ठगी होने की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करने या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी जाए।
बैठक में ये रहे उपस्थित
डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा, राजेश अग्रवाल के दिशा-निर्देशन में आयोजित इस बैठक में रक्षित निरीक्षक अंबिकापुर तृप्ति सिंह राजपूत, डीसीसी प्रभारी उप निरीक्षक अभय कुमार तिवारी, प्रशिक्षु सूबेदार गुलशन चंद्रा, प्रशिक्षु सूबेदार पेविंन वर्मा, डीसीसी स्टाफ से प्रधान आरक्षक संजीव कुमार त्रिपाठी, आरक्षक मोहन पवार, आरक्षक प्रदीप बखला, महिला आरक्षक मनीषा द्विवेदी, डिस्ट्रिक्ट फ्लीट मैनेजर (FMS) पुरुषोत्तम दास वैष्णव सहित विभिन्न थानों, यातायात शाखा, साइबर सेल और GVK EMRI के कुल 16 चालकों की उपस्थिति रही।

