October 13, 2026
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बलरामपुर  : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप राज्य में संचालित ‘न्योता भोज’ कार्यक्रम सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक समरसता की दिशा में एक बेहद अनूठी और प्रभावी पहल बनकर उभर रहा है। इसी कड़ी में आज बलरामपुर जिले के विकासखंड शंकरगढ़ के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय पहरी में एक भव्य न्योता भोज का आयोजन किया गया। इस आयोजन में बच्चों की थालियां न केवल स्वादिष्ट व्यंजनों से सजीं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और अपनत्व का एक सुंदर संदेश भी प्रसारित हुआ।
स्कूल और समाज के बीच मजबूत होता रिश्ता
न्योता भोज कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यालय और स्थानीय समुदाय के बीच की दूरी को मिटाना है। इसके माध्यम से समाज के विभिन्न वर्ग जैसे पालक, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और दानदाता सीधे स्कूलों में पहुंचकर बच्चों के साथ बैठकर भोजन करते हैं और खुशियां साझा करते हैं।
आज पहरी विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम का सफल संचालन ग्राम पंचायत पहरी के सरपंच, स्कूल के प्रधान पाठक और शिक्षकों के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस दौरान स्थानीय नागरिकों और बच्चों के बीच का तालमेल देखने लायक था।
बच्चों के सर्वांगीण विकास और पोषण पर ध्यान
जिले में शुरू की गई इस पहल से न केवल बच्चों के पोषण स्तर में सुधार आ रहा है, बल्कि उनके भीतर यह विश्वास भी मजबूत हो रहा है कि पूरा समाज उनके साथ खड़ा है। न्योता भोज के प्रमुख लाभ और उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
गुणवत्तापूर्ण व पौष्टिक भोजन: बच्चों को नियमित रूप से मिलने वाले मध्यान्ह भोजन के साथ-साथ विशेष अवसरों पर अतिरिक्त पोषक तत्वों से भरपूर और स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनके शारीरिक और मानसिक विकास को गति मिल सके।
स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता: इस तरह के आयोजनों के माध्यम से दानदाता और जनप्रतिनिधि बच्चों को व्यक्तिगत स्वच्छता, हाथ धोने के सही तरीकों और अच्छे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हैं।
नियमित उपस्थिति में सुधार: जब समाज और परिवार के लोग स्कूल की गतिविधियों में सीधे शामिल होते हैं, तो बच्चों में स्कूल आने के प्रति उत्साह बढ़ता है, जिससे उनकी नियमित उपस्थिति दर्ज हो रही है।
सामाजिक समरसता का अनूठा संदेश
न्योता भोज केवल एक भोजन कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह जाति, वर्ग और सामाजिक भेदभाव की दीवारों को गिराने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है। जब गांव के जिम्मेदार नागरिक, जनप्रतिनिधि और बच्चे एक ही पंक्ति में बैठकर एक साथ भोजन करते हैं, तो इससे बच्चों के कोमल मन में समानता और अपनत्व की गहरी भावना विकसित होती है।
सामुदायिक सहयोग की इस अनूठी मिसाल ने यह साबित कर दिया है कि यदि समाज और शिक्षा व्यवस्था हाथ मिला लें, तो बच्चों के सर्वांगीण विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्य को बेहद आसानी से हासिल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस सोच को जमीनी स्तर पर उतारने में बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ का यह आयोजन एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।

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