
सूरजपुर : देश और राज्य की आंतरिक सुरक्षा में तैनात सुरक्षा बलों के जवानों को मानसिक रूप से सशक्त बनाने और कठिन परिस्थितियों में उनकी भावनात्मक सुदृढ़ता को बनाए रखने के लिए छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सूरजपुर के सिलफिली स्थित छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) की 10वीं वाहिनी के परिसर में “तनाव प्रबंधन एवं आत्महत्या रोकथाम हेतु गेटकीपर प्रशिक्षण” विषय पर एक दिवसीय विस्तृत कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वारा आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा बलों के जवानों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना और कार्यस्थल पर पैदा होने वाले तनाव को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करना रहा।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का साझा प्रयास
यह विशेष पहल जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष समन्वय से संभव हो सकी। कार्यशाला का आयोजन कलेक्टर रेना जमील के कुशल निर्देशन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. के. डी. पैकरा के सीधे मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम को धरातल पर उतारने और इसकी रूपरेखा तैयार करने में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश पैकरा एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक संदीप नामदेव ने मुख्य भूमिका निभाई।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि सुरक्षा बल के जवान लगातार अत्यंत कठिन, चुनौतीपूर्ण और कई बार एकाकी परिस्थितियों में अपनी सेवाएं देते हैं। लंबे समय तक परिवार से दूर रहने और ड्यूटी के कड़े नियमों के कारण जवानों में मानसिक दबाव या अवसाद (डिप्रेशन) पनपने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में समय-समय पर उनके मानसिक स्वास्थ्य का मूल्यांकन करना और उन्हें संबल देना बेहद आवश्यक है।
कार्यशाला के मुख्य उद्देश्य और व्यावहारिक प्रशिक्षण
सिलफिली में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला के दौरान मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जवानों को कार्यस्थल पर उत्पन्न होने वाले तनाव के विभिन्न कारणों, उनके शारीरिक व मानसिक प्रभावों तथा इनसे निपटने के व्यावहारिक तौर-तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान केवल व्याख्यान नहीं दिए गए, बल्कि जवानों को तनाव से तुरंत राहत पाने के लिए कई व्यावहारिक अभ्यास भी कराए गए, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
श्वास-व्यायाम (ब्रीदिंग एक्सरसाइज): तनाव या घबराहट के क्षणों में दिल की धड़कन और दिमाग को शांत करने वाली विशेष श्वसन तकनीकें।
रिलैक्सेशन तकनीक: मांसपेशियों और मस्तिष्क की थकान को कम करने वाले वैज्ञानिक तरीके।
संतुलित जीवनशैली: कठिन ड्यूटी के बीच भी अपने खान-पान, नींद और सकारात्मक सोच को बनाए रखने के गुर।
क्या है ‘गेटकीपर प्रशिक्षण’ और क्यों है यह जरूरी?
इस कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा “गेटकीपर प्रशिक्षण” था। इसके तहत सुरक्षा बल के अधिकारियों और साथी जवानों को ‘गेटकीपर’ यानी एक सजग प्रहरी के रूप में प्रशिक्षित किया गया। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि कई बार अवसाद से घिरा व्यक्ति सीधे अपनी बात नहीं कह पाता, लेकिन उसके व्यवहार में बदलाव आने लगता है।
जवानों को सिखाया गया कि वे अपने बैरक या कार्यस्थल पर साथी जवानों में दिख रहे मानसिक तनाव, अकेले रहने की आदत, चिड़चिड़ेपन या आत्महत्या के शुरुआती चेतावनी संकेतों (वार्र्लिंग साइंस) की समय रहते पहचान कैसे करें। विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यदि कोई साथी गंभीर तनाव में दिख रहा है, तो उसकी बात को ध्यान से सुनना, उसे भावनात्मक सहयोग देना और सही समय पर पेशेवर परामर्श (काउंसलिंग) उपलब्ध कराना किसी का जीवन बचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकता है।
विशेषज्ञों का परामर्श: संकोच का त्याग करें
जिला चिकित्सालय सूरजपुर के मानसिक स्वास्थ्य दल से पहुंचे क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सचिन मातुरकर एवं सोशल वर्कर प्रियंका मंडल ने कार्यशाला में जवानों से सीधा संवाद किया। विशेषज्ञों ने जवानों को प्रेरित करते हुए कहा कि शारीरिक बीमारी की तरह मानसिक अस्वस्थता या तनाव भी पूरी तरह सामान्य है। जवानों को किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव या उलझन की स्थिति में बिना किसी सामाजिक संकोच या हिचकिचाहट के मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए।
जवानों की सक्रिय सहभागिता और भविष्य की रूपरेखा
इस प्रशिक्षण सत्र में 10वीं वाहिनी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, सिलफिली के तमाम उच्च अधिकारियों सहित बहुत बड़ी संख्या में जवानों ने हिस्सा लिया। जवानों ने न केवल विशेषज्ञों की तकनीकों को सीखा, बल्कि इस खुले मंच का लाभ उठाते हुए अपने व्यक्तिगत व व्यावहारिक अनुभव भी साझा किए। उन्होंने ड्यूटी के दौरान आने वाली मानसिक दिक्कतों और पारिवारिक चिंताओं से जुड़े कई सवाल विशेषज्ञों के सामने रखे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा मौके पर ही समाधान और उचित काउंसलिंग की गई।
कार्यक्रम के समापन के अवसर पर वाहिनी के अधिकारियों और प्रतिभागी जवानों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस संवेनदशील पहल की भूरि-भूरि सराहना की। उपस्थित अधिकारियों ने इस बात की आवश्यकता पर विशेष बल दिया कि जवानों को मानसिक रूप से हमेशा ऊर्जावान, तनावमुक्त और सुदृढ़ बनाए रखने के लिए ऐसे जागरूकता और गेटकीपर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन हर कुछ महीनों के अंतराल पर नियमित रूप से किया जाना चाहिए।

