लो-वोल्टेज की मार: टाटीझरिया में नल-जल योजना ठप, ढोढ़ी के दूषित पानी के सहारे ग्रामीण, सरपंच ने बिजली विभाग से लगाई गुहार

Deshkibaat24
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विशेष संवादाता मोहम्मद रिजवान

बलरामपुर : जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत टाटीझरिया में लंबे समय से बनी लो-वोल्टेज की समस्या अब ग्रामीणों के लिए एक गंभीर संकट बन चुकी है। क्षेत्र में बिजली आपूर्ति होने के बावजूद पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलने से गांव का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। इसका सबसे घातक असर ग्रामीण पेयजल व्यवस्था पर पड़ रहा है, जहां शासन की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना की मोटरें कम वोल्टेज के कारण पानी खींचने में पूरी तरह असमर्थ हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि ग्रामीणों को पीने का पानी जुटाने और बर्तन धोने जैसे दैनिक कार्यों के लिए पारंपरिक व असुरक्षित प्राकृतिक जल स्रोतों (ढोढ़ी) का सहारा लेना पड़ रहा है।
गांव की लगातार बिगड़ती स्थिति और जनआक्रोश को देखते हुए ग्राम पंचायत टाटीझरिया के सरपंच व कुसमी सरपंच संघ के अध्यक्ष संतोष इंजीनियर ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के वितरण केंद्र कुसमी के सहायक अभियंता को लिखित आवेदन सौंपा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने विभाग से तत्काल हस्तक्षेप करने और इस दीर्घकालिक समस्या का स्थाई तकनीकी समाधान करने की पुरजोर मांग की है।
वर्षों पुरानी समस्या, अब तक नहीं मिला स्थाई समाधान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, टाटीझरिया पंचायत के लगभग सभी वार्ड पिछले कई वर्षों से लो-वोल्टेज की मार झेल रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में पूर्व में भी कई बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन बिजली विभाग की उदासीनता के कारण अब तक कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला जा सका।
वर्तमान में बारिश के मौसम के कारण स्थिति और अधिक भयावह हो गई है। आसमान में बादल छाते ही या सामान्य बारिश होते ही वोल्टेज का स्तर इतना गिर जाता है कि घरों में लगे विद्युत उपकरण केवल नाम मात्र के लिए चलते हैं या पूरी तरह काम करना बंद कर देते हैं।
पेयजल संकट और स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
कम वोल्टेज का सबसे गंभीर और चिंताजनक प्रभाव गांव की पेयजल आपूर्ति पर पड़ा है। पर्याप्त विद्युत दबाव (वोल्टेज) न होने से पानी की मोटरें चालू नहीं हो पा रही हैं, जिससे कई मोहल्लों में पिछले कई दिनों से नियमित जलापूर्ति पूरी तरह बाधित है।
इस स्थिति में घरों की महिलाएं, बुजुर्ग और मासूम बच्चे दूर-दराज स्थित ढोढ़ी (कच्चे कुएं या झरिया) से सिर पर बर्तन रखकर पानी ढोने को मजबूर हैं। भीषण उमस और बरसात के इस मौसम में खुले व प्राकृतिक जल स्रोतों के पानी का उपयोग करना स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद खतरनाक माना जा रहा है। डॉक्टरों और जानकारों के मुताबिक, बारिश के दिनों में ढोढ़ी का पानी दूषित हो जाता है, जिससे डायरिया, पीलिया और पेट जनित महामारियों के फैलने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
घरेलू कामकाज ठप, बच्चों की पढ़ाई भगवान भरोसे
लो-वोल्टेज के कारण केवल पानी की समस्या ही नहीं है, बल्कि ग्रामीण घरों के भीतर भी नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। उमस भरे इस मौसम में पंखे और कूलर पर्याप्त गति से नहीं चल पा रहे हैं, जिससे लोग रात-रात भर सो नहीं पा रहे हैं। इसके अतिरिक्त फ्रिज, मिक्सर और अन्य जरूरी घरेलू उपकरण शोपीस बनकर रह गए हैं।
इस समस्या की सबसे बड़ी गाज स्कूली छात्र-छात्राओं पर गिर रही है। शाम और रात के समय घरों में पर्याप्त रोशनी (डिम लाइट) नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को पढ़ाई करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में मोबाइल चार्ज न हो पाने के कारण ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को अतिरिक्त मानसिक व व्यावहारिक परेशानी उठानी पड़ रही है।
निरीक्षण और तकनीकी सुधार की मांग
सरपंच संतोष इंजीनियर ने सहायक अभियंता को भेजे गए अपने शासकीय पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि पंचायत के सभी वार्डों के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने विभाग से मांग की है कि कुसमी वितरण केंद्र के तकनीकी दल को तत्काल टाटीझरिया भेजा जाए, जो गांव की विद्युत वितरण व्यवस्था, मुख्य बिजली लाइनों और लगे हुए ट्रांसफार्मरों का गहन निरीक्षण करे।
ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि गांव में लगे वर्तमान ट्रांसफार्मर पर लोड क्षमता से अधिक हो चुका है। जब तक यहां अतिरिक्त या उच्च क्षमता (High Capacity) का नया ट्रांसफार्मर स्थापित नहीं किया जाता और जर्जर तारों को बदला नहीं जाता, तब तक यह समस्या ठीक नहीं होगी।
संतोष इंजीनियर (सरपंच, ग्राम पंचायत टाटीझरिया व अध्यक्ष, सरपंच संघ कुसमी) का आधिकारिक बयान:
“हमारी पंचायत के सभी वार्ड लंबे समय से बिजली के कम वोल्टेज की समस्या से त्रस्त हैं। वोल्टेज न होने के कारण हमारी पूरी नल-जल योजना ठप हो चुकी है। ग्रामीणों को विवश होकर ढोढ़ी का पानी पीना पड़ रहा है, जिससे बीमारी फैलने का डर है। हमने विद्युत विभाग को लिखित आवेदन देकर सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल मौके पर निरीक्षण और स्थाई समाधान की मांग की है। यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पेयजल संकट उग्र रूप ले सकता है और ग्रामीण आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बिजली विभाग के उच्चाधिकारियों से अपील की है कि उन्हें बिजली जैसी मूलभूत सुविधा का पूरा लाभ दिलाया जाए, ताकि उनका दैनिक जीवन पटरी पर लौट सके।

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