बलरामपुर: नए शिक्षा सत्र के पहले दिन स्कूलों में पहुंचीं कलेक्टर, व्यवस्थाओं का लिया जायजा

Deshkibaat24
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बलरामपुर : जिले में नए शिक्षा सत्र के शुभारंभ के साथ ही छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कवायद शुरू हो गई है। इसी कड़ी में कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने सत्र के पहले ही दिन बलरामपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले विभिन्न शासकीय विद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने न केवल स्कूल की बुनियादी व्यवस्थाओं को परखा, बल्कि छात्र-छात्राओं और शिक्षकों से सीधे संवाद कर उन्हें नए सत्र के लिए प्रेरित भी किया।
बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों की जमीनी हकीकत जांची
कलेक्टर ने पूर्व माध्यमिक शाला पिण्ड्रा, जतरो तथा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरदर का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्कूलों में निम्नलिखित व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया:
छात्र एवं शिक्षक उपस्थिति: उन्होंने उपस्थिति पंजिका (रजिस्टर) की जांच की और समय पर स्कूलों के संचालन तथा शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मूलभूत सुविधाएं: स्कूलों में पेयजल (साफ पानी) की व्यवस्था, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालयों की स्थिति और विद्यालय परिसर की साफ-सफाई का निरीक्षण किया।
संसाधनों का वितरण: नए सत्र के पहले ही दिन बच्चों को मिलने वाली पाठ्यपुस्तकों और गणवेश (यूनिफॉर्म) के वितरण की स्थिति की जानकारी ली।
कलेक्टर ने सख्त लहजे में अधिकारियों और प्राचार्यों को निर्देशित किया कि शासन द्वारा बच्चों को दी जाने वाली किसी भी मूलभूत सुविधा में कटौती या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले दिन से ही स्कूलों में पढ़ाई का एक गंभीर और अनुशासित माहौल दिखना चाहिए।
छात्राओं ने जताई पुलिस सेवा में जाने की इच्छा, मिला प्रोत्साहन
कलेक्टर ने कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों से बेहद आत्मीय माहौल में बातचीत की। उन्होंने बच्चों से उनकी पढ़ाई, शौक और भविष्य के लक्ष्यों के बारे में पूछा। इस संवाद के दौरान कई छात्राओं ने बड़े उत्साह के साथ भविष्य में पुलिस सेवा में शामिल होकर देश की सेवा करने का अपना सपना साझा किया।
बच्चों के इस हौसले को देखकर कलेक्टर ने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहा:
“कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता। यदि आपके भीतर लगन, कड़ा अनुशासन और निरंतर मेहनत करने का जज्बा है, तो आप अपने हर सपने को हकीकत में बदल सकते हैं। अपने सपनों को आज ही एक बड़े लक्ष्य का रूप दें और उसे हासिल करने के लिए अभी से पूरी निष्ठा के साथ जुट जाएं।”
शिक्षकों को निर्देश: केवल सिलेबस पूरा कराना ही आपका काम नहीं
शिक्षकों और प्राचार्यों की बैठक लेते हुए चंदन संजय त्रिपाठी ने शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए:
कमजोर बच्चों की पहचान: सत्र के शुरुआती दिनों में ही बच्चों का शैक्षणिक मूल्यांकन (Assessment) किया जाए, ताकि जो बच्चे पढ़ाई में कमजोर हैं, उनकी पहचान कर उन्हें अतिरिक्त कक्षाएं या विशेष मार्गदर्शन दिया जा सके।
सर्वांगीण विकास पर जोर: उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की जिम्मेदारी केवल पाठ्यक्रम (सिलेबस) को समय पर पूरा कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। शिक्षकों को बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने, उनके भीतर आत्मविश्वास जगाने और उनके समग्र व्यक्तित्व विकास (All-round Development) पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
स्मार्ट क्लास और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर बल
भ्रमण के दौरान कलेक्टर ने स्कूलों में स्थापित स्मार्ट क्लास का भी अवलोकन किया। उन्होंने वहां उपलब्ध ऑनलाइन पाठ्यक्रमों और डिजिटल शिक्षण संसाधनों (Digital Learning Tools) के संचालन की प्रक्रिया को देखा। शिक्षकों को निर्देशित किया गया कि वे पारंपरिक पढ़ाई के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और डिजिटल टूल्स का अधिकतम उपयोग करें, ताकि बच्चों के लिए पढ़ाई रुचिकर और गुणवत्तापूर्ण बने। इससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी भविष्य की प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और चुनौतियों के लिए खुद को तैयार कर सकेंगे।
जिला ही नहीं, राज्य स्तर पर पहचान बनाने का लक्ष्य
पिछले सत्र के परीक्षा परिणामों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि जिले के स्कूलों का परीक्षा परिणाम इस बार और बेहतर होना चाहिए। इसके लिए सभी शिक्षकों को पूरी प्रतिबद्धता, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। उन्होंने स्कूलों में एक ऐसा सकारात्मक और प्रेरणादायक माहौल तैयार करने की बात कही, जिससे बलरामपुर जिले के छात्र न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राज्य की प्रावीण्य सूची (Merit List) में भी अपनी उत्कृष्ट पहचान दर्ज करा सकें।

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