अंबिकापुर : सरगुजा पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दुर्लभ रेडियोएक्टिव पदार्थ और एंटीक सामान बेचने के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने जाल बिछाकर तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो अलग-अलग राज्यों से इस रैकेट को संचालित कर रहे थे। ठगों ने प्रार्थी से योजनाबद्ध तरीके से कुल 3,08,78000 रुपये (तीन करोड़ आठ लाख अठहत्तर हजार रुपये) की मोटी रकम ऐंठ ली थी।
फर्जी दस्तावेज दिखाकर जाल में फंसाया
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, गंगापुरखुर्द (थाना गांधीनगर, जिला सरगुजा) निवासी करमबेल कच्छप (पिता लाल साय राम कच्छप, उम्र 41 वर्ष) ने गांधीनगर थाने में इस धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्रार्थी ने बताया कि 2 जुलाई 2023 से 30 सितंबर 2024 के बीच आरोपियों ने उसे अपने जाल में फंसाया।
आरोपियों ने खुद को दुर्लभ और बेशकीमती पुरानी वस्तुओं का कारोबारी बताया। प्रार्थी को विश्वास में लेने के लिए उन्होंने फर्जी लैब रिपोर्ट और जाली रजिस्ट्रेशन दस्तावेज दिखाए। उन्होंने दावा किया कि उनके पास अत्यंत दुर्लभ ‘रेडियोएक्टिव पदार्थ’ है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी कीमत है। इसकी पैकिंग और सुरक्षित बिक्री की कागजी प्रक्रियाओं के नाम पर आरोपियों ने अलग-अलग किस्तों में प्रार्थी से कुल 3.08 करोड़ रुपये से अधिक की रकम धोखाधड़ी कर प्राप्त कर ली।
बीएनएस की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
जब प्रार्थी को अपने साथ हुई ठगी का अहसास हुआ, तो उसने पुलिस की शरण ली। गांधीनगर थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया।
अपराध क्रमांक: 217/2026
धाराएं: 318(4) (धोखाधड़ी), 317(4), 111 (संगठित अपराध), 61(2) (साजिश) और 3(5) बीएनएस।
यह पूरी कार्रवाई डीआईजी एवं एसएसपी राजेश अग्रवाल (पुलिस अधीक्षक सरगुजा) के कड़े दिशा-निर्देशों और मार्गदर्शन में शुरू की गई।
तीन राज्यों में छापेमारी, पटना रेलवे स्टेशन पर घेराबंदी
मामले की जांच के लिए गांधीनगर पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम बनाई गई। साइबर सेल से मिले तकनीकी इनपुट और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पता चला कि आरोपी छत्तीसगढ़ से बाहर भाग चुके हैं। इसके बाद पुलिस की दो विशेष टीमें गठित कर उत्तर प्रदेश (बनारस) और पश्चिम बंगाल रवाना की गईं।
इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि गिरोह के दो मुख्य सदस्य बिहार के रास्ते भागने की फिराक में हैं। सरगुजा पुलिस ने तत्काल रेलवे सुरक्षा बल (RPF) बिलासपुर की टीम से संपर्क साधा और संयुक्त रूप से पटना रेलवे स्टेशन (बिहार) पर तगड़ी घेराबंदी की। इस संयुक्त ऑपरेशन में दो आरोपियों को पटना स्टेशन से दबोच लिया गया। वहीं, तीसरे आरोपी को उत्तर प्रदेश के बनारस से गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की कुंडली
पुलिस हिरासत में लिए गए आरोपियों से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नाम और विवरण इस प्रकार हैं:
डॉक्टर बल्ला रामा कृष्णा (उम्र 51 वर्ष): आत्मज बल्ला, निवासी रत्नेश्वर घाट रोड गारुलिया, थाना नौपाडा, जिला हाल मुकाम कौशल्या मनिदीपम, तेलंगाना।
Sanjay कुमार बिन्द (उम्र 38 वर्ष): पिता बाबू लाल, निवासी जलाली पट्टी, थाना मडुवाडीह, वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
बाबू लाल राजभर (उम्र 55 वर्ष): पिता स्वर्गीय राजाराम, निवासी बेलरिया, कृष्णा नगर, पिंडरा, वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ठगी के पैसों के लेन-देन में इस्तेमाल किए गए एटीएम कार्ड, बैंक चेकबुक और कई मोबाइल फोन जब्त किए हैं। सभी आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेज दिया गया है।
इस टीम को मिली बड़ी सफलता
इस जटिल और अंतरराज्यीय अंधे कत्ल जैसे ठगी के मामले को सुलझाने में गांधीनगर थाना प्रभारी/निरीक्षक प्रवीण कुमार द्विवेदी, आरक्षक अरविंद उपाध्याय, अमृत सिंह, रिषभ सिंह, अतुल सिंह और विकास सिंह की मुख्य भूमिका रही। वहीं, तकनीकी सहायता प्रदान करने में साइबर सेल से सउनि अजीत मिश्रा, आरक्षक रमेश राजवाड़े तथा रेलवे सुरक्षा बल (RPF) बिलासपुर से उपनिरीक्षक डी.के.सिंह, प्रधान आरक्षक रजनीश द्विवेदी और आरक्षक वैद्यनाथ का विशेष और सराहनीय योगदान रहा।
दुर्लभ रेडियोएक्टिव वस्तु बेचने के नाम पर 3 करोड़ से अधिक की ठगी, अंतरराज्यीय गिरोह के 3 आरोपी गिरफ्तार
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