
छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती और आदिवासी बहुल जिले बलरामपुर-रामानुजगंज में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और संकट के समय आम नागरिकों को त्वरित सहायता पहुंचाने के लिए बहुप्रतीक्षित आपातकालीन ‘डायल 112’ सेवा की शुरुआत हो गई है। पुलिस लाइन के परेड ग्राउंड में आयोजित एक भव्य और आधिकारिक समारोह के दौरान इस सेवा का औपचारिक शंखनाद किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि और प्रतापपुर विधानसभा की विधायक शकुंतला पोर्ते ने आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली (ERSS) के तहत अलॉट किए गए 10 नए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस अवसर पर सरगुजा के सांसद चिंतामणि महाराज भी तकनीक के माध्यम से जुड़े। उन्होंने ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और जिले के नागरिकों को इस आधुनिक सुरक्षा तंत्र के शुरू होने पर बधाई दी।
केंद्रीय गृहमंत्री की पहल का हिस्सा
बलरामपुर जिले में शुरू की गई यह सेवा उस बड़े सुरक्षा नेटवर्क का हिस्सा है, जिसकी रूपरेखा हाल ही में तैयार की गई थी। दरअसल, 18 मई 2026 को देश के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य के लिए 400 आधुनिक आपातकालीन वाहनों को हरी झंडी दिखाई थी। इसी कड़ी के अंतर्गत बलरामपुर-रामानुजगंज पुलिस को 10 विशेष वाहन सौंपे गए हैं, जो आधुनिक जीपीएस, संचार उपकरणों और प्राथमिक सुरक्षा किट से लैस हैं।
प्रशासनिक और पुलिस नेतृत्व की मौजूदगी
जिले में इस सेवा को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने का काम पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर के कुशल मार्गदर्शन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्व दीपक त्रिपाठी के सीधे निर्देशन में किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि भौगोलिक दृष्टि से कठिन और दूरस्थ इलाकों वाले इस जिले में डायल 112 गेमचेंजर साबित होगी।
लॉन्चिंग के इस मौके पर जिले के तमाम बड़े प्रशासनिक चेहरे मौजूद रहे, जिनमें पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर, जिला वन मंडल अधिकारी आलोक बाजपेयी, जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्व दीपक त्रिपाठी प्रमुख रूप से शामिल थे। इनके अलावा स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
एक ही नंबर पर मिलेंगी सभी आपातकालीन सेवाएं
अब तक जिले के नागरिकों को अलग-अलग समस्याओं के लिए अलग-अलग नंबरों पर संपर्क करना पड़ता था, जिससे आपात स्थिति में समय का नुकसान होता था। अब ‘डायल 112’ के सक्रिय होने से एकीकृत कमांड सेंटर काम करेगा। आम नागरिक किसी भी वक्त इस नंबर पर कॉल कर निम्नलिखित सहायता पा सकते हैं:
सड़क दुर्घटनाएं: राष्ट्रीय राजमार्ग या आंतरिक सड़कों पर होने वाले हादसों के दौरान घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए टीम सक्रिय होगी।
मेडिकल इमरजेंसी: गंभीर बीमारी या प्रसव जैसी स्थितियों में एम्बुलेंस समन्वय का काम त्वरित गति से होगा।
महिला सुरक्षा एवं घरेलू हिंसा: महिलाओं से संबंधित अपराधों, छेड़खानी या घरेलू विवादों की सूचना मिलते ही पुलिस की त्वरित रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंचेगी।
अपराध नियंत्रण: चोरी, मारपीट, डकैती या किसी भी तरह के सामाजिक उपद्रव की स्थिति में कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए बल रवाना किया जाएगा।
अग्निशमन सेवाएं: आगजनी की घटनाओं के दौरान फायर ब्रिगेड को तुरंत सूचित कर घटनास्थल के लिए रवाना कराया जाएगा।
24 घंटे सक्रिय रहेगा तंत्र, पुलिस ने की सतर्क रहने की अपील
पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर ने इस सेवा की कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाते हुए कहा कि डायल 112 पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत और सैटेलाइट ट्रैकिंग सिस्टम पर आधारित है। जैसे ही कंट्रोल रूम को कोई कॉल प्राप्त होगी, घटना स्थल के सबसे नजदीक मौजूद वाहन को तुरंत जीपीएस के जरिए अलर्ट भेजा जाएगा। यह सेवा बिना किसी ब्रेक के 24 घंटे और सातों दिन काम करेगी।
इसके साथ ही पुलिस प्रशासन ने आम जनता से एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाने का आग्रह किया है। पुलिस अधीक्षक ने अपील की है कि:
“यह सेवा पूरी तरह से वास्तविक पीड़ितों की जान और माल की रक्षा के लिए बनाई गई है। नागरिक आपात स्थिति में बिना डरे और बिना घबराए इस पर संपर्क करें। लेकिन साथ ही, इस नंबर पर मजाक में, फर्जी या अनावश्यक कॉल करने से कड़ाई से बचें। एक गलत कॉल के कारण किसी वास्तविक जरूरतमंद तक पहुंचने में पुलिस को देरी हो सकती है।”
बलरामपुर पुलिस ने साफ किया है कि फर्जी कॉल कर व्यवस्था को बाधित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। इस नई शुरुआत से जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के भीतर सुरक्षा की एक नई भावना पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

