विशेष रिपोर्ट: धान खरीदी केंद्रों पर पत्रकारों से बदसलूकी अब बर्दाश्त नहीं, ‘मीडिया सम्मान परिवार’ ने दी प्रबंधकों को खुली चेतावनी

Deshkibaat24
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छत्तीसगढ़: प्रदेश में धान खरीदी का सीजन अपने चरम पर है, लेकिन इस बीच समितियों से पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार की लगातार आती खबरों ने मीडिया जगत में आक्रोश पैदा कर दिया है। पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए सक्रिय संगठन ‘मीडिया सम्मान परिवार’ ने प्रदेश के समस्त धान समिति प्रबंधकों के नाम एक “सार्वजनिक चेतावनी पत्र” जारी किया है। संगठन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का अपमान अब और सहन नहीं किया जाएगा।
सिस्टम को आईना दिखाने की कोशिश
जारी किए गए पत्र में किसी व्यक्ति विशेष को नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को निशाने पर लिया गया है। संगठन का कहना है कि प्रदेश की कई समितियों से ऐसी शिकायतें मिल रही हैं जहाँ पत्रकारों के साथ न केवल बदसलूकी की जा रही है, बल्कि उन्हें धमकाया जा रहा है और कवरेज करने से रोका जा रहा है।
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि:
पत्रकार किसी समिति प्रबंधक के निजी दुश्मन नहीं हैं।
सवाल पूछना कोई अपराध नहीं, बल्कि किसानों की समस्याओं को उजागर करना पत्रकारों का नैतिक कर्तव्य है।
यदि समितियों के कामकाज में पारदर्शिता है, तो प्रबंधकों को कैमरों और मीडिया के सवालों से डर क्यों लगता है?
‘मान्यता’ के नाम पर गुमराह करना बंद करें प्रबंधक
अक्सर देखा जाता है कि धान केंद्रों पर जब पत्रकार अनियमितताओं की पोल खोलते हैं, तो प्रबंधक उनसे ‘मान्यता पत्र’ (Accreditation) की मांग करते हैं। इस पर संगठन ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ का जनसंपर्क विभाग किसी को ‘पत्रकार होने का प्रमाण पत्र’ नहीं बांटता। आज के दौर में हर जागरूक नागरिक और पत्रकार के पास कैमरा है और उसे संवैधानिक रूप से सवाल पूछने का अधिकार प्राप्त है।
पाँच बिंदुओं पर खुली चेतावनी
मीडिया सम्मान परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी भी धान समिति में निम्नलिखित स्थितियाँ पाई गईं, तो उसके परिणाम गंभीर होंगे:
पत्रकार के साथ गाली-गलौज या अभद्र भाषा का प्रयोग।
रिपोर्टिंग के दौरान मोबाइल या कैमरा छीनना।
कवरेज करने से जबरन रोकना या धक्का-मुक्की करना।
“विज्ञापन बंद करा देने” जैसी धमकियाँ देकर दबाव बनाना।
पत्रकारों के विरुद्ध फर्जी एफआईआर (FIR) की साजिश रचना।
चुप नहीं बैठेगा मीडिया जगत: अब होगी सीधी कार्रवाई
संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि इसे अब व्यक्तिगत विवाद नहीं माना जाएगा, बल्कि इसे प्रेस की स्वतंत्रता और किसानों की आवाज दबाने की साजिश माना जाएगा। ऐसी स्थिति में:
दोषी प्रबंधकों के नाम और उनके काले कारनामे सार्वजनिक किए जाएंगे।
घटना के वीडियो फुटेज सोशल मीडिया और न्यूज़ चैनलों पर वायरल किए जाएंगे।
जिला, संभाग और राज्य स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों से लिखित शिकायत कर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जरूरत पड़ने पर न्यायालय की शरण ली जाएगी।
विज्ञापन का भ्रम और स्वतंत्रता का अर्थ
पत्र में प्रबंधकों के उस अहम को भी तोड़ा गया है जिसमें वे विज्ञापन का लालच देकर पत्रकारों को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। संगठन ने कहा, “विज्ञापन देना या न देना संस्थान का अधिकार हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि आप पत्रकार को अपमानित करें या डराएं। स्वतंत्रता का अर्थ अराजकता नहीं होता।”
अंतिम शालीन अपील
लेख के अंत में मीडिया सम्मान परिवार ने शांतिपूर्ण संवाद की अपील भी की है। उन्होंने कहा है कि मीडिया जगत टकराव या हिंसा नहीं चाहता, बल्कि सम्मान और पारदर्शिता चाहता है। लेकिन यदि पत्रकारों को ‘कमजोर’ समझने की भूल की गई, तो यह प्रबंधकों की सबसे बड़ी गलतफहमी होगी।
यह पत्र प्रदेश के उन तमाम प्रबंधकों के लिए एक “अंतिम चेतावनी” है जो सत्ता या पद के नशे में लोकतंत्र की आवाज को कुचलने का प्रयास कर रहे हैं।

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