129 दिनों तक बिना अनुमति गायब रहने वाले आरक्षक पर गाज, सूरजपुर एसपी ने की सेवा से पृथक करने की कार्रवाई

Deshkibaat24
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सूरजपुर: जिले के पुलिस विभाग में अनुशासन, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता बनाए रखने के उद्देश्य से जिला पुलिस सूरजपुर ने एक बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। लगातार 129 दिनों तक बिना किसी सक्षम अनुमति और विधिवत सूचना के ड्यूटी से नदारद रहने वाले आरक्षक अमरदीप विश्वकर्मा को विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद सेवा से बर्खास्त (पृथक) कर दिया गया है। यह कड़ा आदेश सूरजपुर के पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल (भा.पु.से.) द्वारा विभागीय जांच रिपोर्ट, अभियोजन साक्ष्यों, सेवा अभिलेखों तथा उपलब्ध कानूनी दस्तावेजों के गहन परीक्षण के उपरांत जारी किया गया है।
बंदी पेशी की ड्यूटी से गायब हुआ था आरक्षक
विभागीय जांच से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरक्षक अमरदीप विश्वकर्मा की ड्यूटी 25 जून 2025 को बंदी पेशी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए लगाई गई थी। हालांकि, आरक्षक उस दिन तय समय पर ड्यूटी पर उपस्थित होने के बजाय बिना किसी सूचना के गायब हो गया। इसके बाद वह 25 जून 2025 से 31 अक्टूबर 2025 तक लगातार 129 दिनों तक बिना किसी पूर्व स्वीकृति या विभाग को विधिवत सूचित किए अनुपस्थित रहा।
इस लंबी अनुपस्थिति के दौरान पुलिस विभाग द्वारा आरक्षक को कई बार कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते हुए तत्काल ड्यूटी पर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए। इसके बावजूद, आरक्षक न तो समय पर उपस्थित हुआ और न ही उसने नोटिस का कोई संतोषजनक उत्तर दिया।
विभागीय जांच में प्रक्रियात्मक खामियां और अनुशासनहीनता उजागर
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने आरक्षक के विरुद्ध विधिवत विभागीय जांच प्रारंभ की। जांच प्रक्रिया के दौरान आरोपी आरक्षक को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर प्रदान किया गया तथा नियमानुसार आरोप पत्र जारी किया गया। जांच अधिकारी ने मामले से जुड़े तमाम दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और अभियोजन साक्ष्यों का सूक्ष्मता से परीक्षण किया।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरक्षक अमरदीप विश्वकर्मा ने अपने बचाव में स्वास्थ्य एवं उपचार संबंधी कुछ दस्तावेज तो प्रस्तुत किए, लेकिन इतनी लंबी अवधि तक अनुपस्थित रहने के बावजूद उसने विभाग को न तो कोई पूर्व लिखित सूचना दी थी और न ही अवकाश स्वीकृति हेतु कोई आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था। पुलिस जैसे अनुशासित बल में बिना सक्षम अनुमति के लंबे समय तक अनुपस्थित रहना और निर्धारित शासकीय प्रक्रियाओं का पालन न करना गंभीर अनुशासनहीनता एवं घोर कर्तव्यहीनता माना गया।
खराब सेवा रिकॉर्ड: बार-बार सजा मिलने के बाद भी नहीं आया सुधार
विभागीय जांच के दौरान आरक्षक के पिछले सेवा अभिलेखों (Service Records) की भी गहन पड़ताल की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि उसका पूर्व रिकॉर्ड भी अत्यंत असंतोषजनक रहा है। पुलिस सेवा में नियुक्ति के बाद से ही आरक्षक अमरदीप विश्वकर्मा कई बार अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के मामलों में विभागीय जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर चुका था।
सेवा अभिलेखों के अनुसार, उसे पूर्व में कई बार छोटी एवं बड़ी विभागीय सजाएं दी जा चुकी थीं। इनमें विभिन्न अवसरों पर अनुपस्थिति अवधि को अवैतनिक घोषित करना, वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) रोकना और अन्य दंडात्मक कदम शामिल थे। इन तमाम सजाओं और सुधार के अवसरों के बावजूद उसके आचरण और कार्यशैली में कोई अपेक्षित बदलाव नहीं आया। सेवा रिकॉर्ड से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि आरक्षक पुलिस सेवा की जिम्मेदारियों के प्रति गंभीर नहीं है और भविष्य में उसके एक अनुशासित पुलिस कर्मचारी बने रहने की संभावना न के बराबर है।
अंतिम आदेश: बर्खास्तगी और अवैतनिक अवधि
विभागीय जांच में सभी आरोप पूर्णतः प्रमाणित पाए जाने के बाद, सूरजपुर पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल ने कठोर निर्णय लेते हुए आरक्षक अमरदीप विश्वकर्मा को 31 जुलाई 2026 को सेवा से पृथक करने का अंतिम आदेश जारी कर दिया।
इसके साथ ही, 25 जून 2025 से 31 अक्टूबर 2025 तक की 129 दिनों की अनाधिकृत अनुपस्थिति की अवधि को छत्तीसगढ़ पुलिस नियमों के तहत ‘कार्य नहीं, वेतन नहीं’ (No Work, No Pay) के सिद्धांत के आधार पर अवैतनिक घोषित कर दिया गया है।
एसपी योगेश कुमार पटेल का वक्तव्य:
“पुलिस विभाग एक अनुशासित बल है, जहां प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी से उच्च कोटि की कर्तव्यनिष्ठा, जवाबदेही और कड़े अनुशासन की अपेक्षा की जाती है। विभागीय नियमों का उल्लंघन, अनाधिकृत अनुपस्थिति और काम के प्रति लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। जिला पुलिस सूरजपुर में अनुशासनहीनता के मामलों में भविष्य में भी निष्पक्ष एवं कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि पुलिस बल की कार्यकुशलता, जवाबदेही और जनविश्वास बना रहे।”

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