
सूरजपुर : जिले में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और स्थानीय कृषकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कलेक्टर रेना जमील ने शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र बसदई का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मत्स्य बीज उत्पादन की प्रक्रियाओं को बारीकी से समझा और क्षेत्र के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज उपलब्ध कराने के लिए अधिकारियों को सख्त व आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
🏗️ उत्पादन इकाइयों और संवर्धन तकनीकों का बारीकी से लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान रेना जमील ने प्रक्षेत्र में संचालित विभिन्न आधुनिक एवं पारंपरिक मत्स्य संवर्धन तकनीकों का अवलोकन किया। उन्होंने:
हैचरी, स्पॉनिंग पूल एवं इनक्यूबेशन पूल की कार्यप्रणाली को देखा।
इनटेकवेल, प्रजनक पोखर (Breeding Ponds) तथा संवर्धन पोखरों की स्थिति का जायजा लिया।
मत्स्य बीज की विभिन्न अवस्थाओं जैसे स्पॉन, फ्राई एवं फिंगरलिंग के उत्पादन, रखरखाव और वितरण प्रणाली से संबंधित विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
इस अवसर पर उन्होंने सहायक संचालक मछली पालन एम.एस. सोनवानी को निर्देशित किया कि जिले के मत्स्य कृषकों को उन्नत एवं गुणवत्तायुक्त बीज समय पर उपलब्ध कराया जाए, ताकि मत्स्य पालन गतिविधियों को जिले में और अधिक व्यापक स्तर पर विस्तार दिया जा सके।
🌾 जल संरचनाओं का उपयोग और बहुआयामी ‘मिश्रित खेती’ पर बल
कलेक्टर ने जिले में जल संसाधनों के बहुउद्देशीय उपयोग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि मनरेगा, अमृत सरोवर, आजीविका डबरी और ‘नवा तरिया’ जैसी योजनाओं के तहत निर्मित जल संरचनाओं का अधिकतम उपयोग मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जाए।
मुख्य दिशा-निर्देश:
क्लस्टर आधारित मॉडल: समूह आधारित क्लस्टर गठित कर मत्स्य कृषकों के माध्यम से बीज संचयन कराया जाए।
मेढ़ों पर पौधरोपण: तालाबों और डबरियों के मेढ़ों (किनारों) का उपयोग कर वहाँ सब्जी और फलदार पौधे लगाने की एक सुव्यवस्थित कार्ययोजना तैयार की जाए।
मिश्रित खेती से आय में वृद्धि: कृषि, बागवानी, पशुपालन और मत्स्य पालन का आपस में समन्वय स्थापित कर ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ किया जाए।
नवाचार को प्रोत्साहन: जिले में व्यावसायिक संभावनाओं को देखते हुए रंगीन मछली पालन (Ornamental Fisheries) तथा झींगा पालन (Prawn Farming) को बढ़ावा देने हेतु विशेष योजना बनाने के निर्देश दिए गए।
📊 वित्तीय वर्ष 2026-27: लक्ष्य और अब तक की उपलब्धियाँ
निरीक्षण के दौरान सहायक संचालक मछली पालन एम.एस. सोनवानी ने कलेक्टर को जिले के चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के उत्पादन लक्ष्यों और अब तक की प्रगति की जानकारी दी:
मद / घटकनिर्धारित लक्ष्य (2026-27)वर्तमान उपलब्धि
स्पॉन उत्पादन420 लाख320 लाख (हासिल)
स्टैण्डर्ड फ्राई उत्पादन90 लाखप्रगति
अधिकारियों ने बताया कि शेष बचे लक्ष्य को भी समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
🐟 सफल मत्स्य कृषक नरेंद्र सिंह के मॉडल फॉर्म का अवलोकन
शासकीय प्रक्षेत्र का निरीक्षण करने के बाद रेना जमील ग्राम बसदई स्थित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लाभार्थी नरेंद्र सिंह के खेत पहुँचीं। उन्होंने वहाँ स्थापित पौंड लाईनर इकाई का अवलोकन किया।
लागत और मुनाफा: नरेंद्र सिंह ने बताया कि बीते वर्ष उन्होंने केवल मछली विक्रय से 5 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त की है।
वर्तमान संचयन: वर्तमान में उनके पौंड लाईनर में 20 हजार पंगेशियस, 15 हजार रूपचंदा तथा कतला, रोहू व मृगल प्रजाति के मत्स्य बीज का संचयन किया गया है।
बहुआयामी आजीविका: मत्स्य पालन के साथ-साथ नरेंद्र सिंह गाय, बत्तख और बकरी पालन भी समानांतर रूप से कर रहे हैं।
कलेक्टर ने नरेंद्र सिंह के इस एकीकृत एवं बहुआयामी आजीविका मॉडल और उनके उत्कृष्ट प्रबंधन की खुले दिल से सराहना की और अन्य किसानों के लिए इसे प्रेरणादायी बताया।
👥 निरीक्षण के दौरान उपस्थित अधिकारी व जन प्रतिनिधि
इस विस्तृत भ्रमण और निरीक्षण के दौरान प्रशासन एवं संबंधित विभागों के कई प्रमुख अधिकारी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे:
प्रशासनिक व विभागीय अधिकारी: अनुविभागीय अधिकारी शिवानी जायसवाल, एसडीओ आरईएस विमल सिंह, एपीओ कृष्ण मोहन पाठक, मनरेगा से सुनिल गुप्ता, सहायक संचालक मछली पालन एम.एस. सोनवानी, सहायक मत्स्य अधिकारी सुधाकर बिसेन।
स्थानीय प्रतिनिधि व कर्मचारी: ग्राम सरपंच मनोज सिंह, सचिव शिवनारायण, उप सरपंच गौतम राजवाड़े, मत्स्य जमादार छोटेलाल तिर्की, सतीश तिग्गा, मछुआ चौकीदार रूकमणीरमण तिवारी तथा क्षेत्र के अन्य कर्मचारी व ग्रामीण।

