एक्सक्लूसिव: ठग मेराज अंसारी का नया ‘कांड’; पैसे हड़पे और अब जातिसूचक गालियां देकर जान से मारने की धमकी!

Deshkibaat24
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सूरजपुर। जिला मुख्यालय में करोड़ों की ठगी के मुख्य आरोपी मेराज अंसारी उर्फ लबलू की मुश्किलें अब और बढ़ने वाली हैं। मेराज न केवल वित्तीय जालसाजी का आरोपी है, बल्कि अब उस पर एक स्थानीय व्यवसायी को जातिगत रूप से अपमानित करने और SC/ST एक्ट के तहत गंभीर अपराध करने का आरोप लगा है। पीड़ित ने न्याय की गुहार लगाते हुए पुलिस के अनुसूचित जाति/जनजाति विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है।
भरोसे का कत्ल: लाखों हड़पे, बदले में मिला ‘जातिगत अपमान’
सूत्रों के अनुसार, मेराज ने अपने एक पुराने परिचित व्यवसायी से निजी जरूरतों और घर निर्माण के नाम पर लाखों रुपये की बड़ी धनराशि उधार ली थी। यह लेनदेन नगद और डिजिटल माध्यमों से हुआ था। जब पीड़ित ने अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई वापस मांगी, तो मेराज ने अपनी असलियत दिखाते हुए न केवल पैसे देने से इनकार कर दिया, बल्कि पीड़ित को “जातिसूचक अपशब्दों” से संबोधित कर सरेआम अपमानित किया।
जांच अधिकारी की भूमिका संदिग्ध: बिना जांच केस क्लोज करने की कोशिश
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब पीड़ित न्याय की उम्मीद में आदिम जाति कल्याण थाने पहुँचा। आरोप है कि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जांचकर्ता अधिकारी ने मामले की निष्पक्ष जांच करने के बजाय, बिना किसी ठोस कारण के केस को क्लोज करने और पीड़ित पर समझौता (सेटलमेंट) करने के लिए अनैतिक दबाव बनाया। पुलिस की यह कार्यप्रणाली अब सीधे तौर पर सवालों के घेरे में है।
SC/ST एक्ट और गिरफ्तारी की तलवार
कानूनी जानकारों के अनुसार, सार्वजनिक रूप से जातिगत टिप्पणी करना और अपमानित करना अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम के तहत एक अत्यंत गंभीर और गैर-जमानती अपराध है।
धमकी का खेल: आरोपी ने पीड़ित के व्यापारिक प्रतिष्ठान (मेडिकल स्टोर) को निशाना बनाने और उसे “रातों-रात गायब करने” की धमकी दी है। पीड़ित अब अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर गहरे खौफ में है।
सेटलमेंट की आड़ में ‘साक्ष्यों से छेड़छाड़’
मेराज अंसारी अपनी गिरफ्तारी टालने के लिए ‘शाम-दाम-दंड-भेद’ की नीति अपना रहा है। खबर है कि करौंदा मुंडा और पटना क्षेत्र के कुछ पीड़ितों को उसने मामूली रकम देकर ‘मैनेज’ करने की कोशिश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि FIR दर्ज होने के बाद पीड़ितों को पैसे का लालच देना सीधे तौर पर साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ (Evidence Tampering) है, जो अपने आप में एक अलग अपराध है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सूरजपुर की जनता में भारी आक्रोश है कि एक आरोपी पुलिस की नाक के नीचे पीड़ितों को डरा-धमका रहा है।
क्या सूरजपुर पुलिस को मेराज के घर हो रही इन ‘गोपनीय मुलाकातों’ की खबर नहीं है?
आदिम जाति कल्याण थाने के जांच अधिकारी ने आखिर किसके दबाव में बिना जांच के केस बंद करने की कोशिश की?
SC/ST एक्ट की शिकायत के बावजूद आरोपी अभी तक खुलेआम धमकियाँ कैसे दे रहा है?

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