जिला जेल सूरजपुर में बंदियों के पुनर्वास हेतु बड़ी पहल: 12 दिवसीय स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

Deshkibaat24
5 Min Read


सूरजपुर : जिला जेल प्रशासन के विशेष दिशा-निर्देशों के तहत जेल परिसर में बंदियों के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा संचालित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI), सूरजपुर के तत्वावधान में जिला जेल सूरजपुर में 12 दिवसीय कौशल विकास एवं स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया है।
इस विशेष पुनर्वास कार्यक्रम में कुल 35 बंदियों का चयन किया गया है, जिन्हें अगरबत्ती निर्माण और साबुन निर्माण का गहन व्यावहारिक व उद्यमिता आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस पूरी योजना का मुख्य ध्येय बंदियों को हुनरमंद बनाकर आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि जेल से रिहा होने के बाद वे समाज की मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक आजीविका अर्जित कर सकें।
उत्पादन से लेकर बाजार प्रबंधन तक का विस्तृत पाठ्यक्रम
इस 12 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि बंदी केवल उत्पाद बनाना ही न सीखें, बल्कि भविष्य में अपना खुद का लघु उद्योग भी स्थापित कर सकें। प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में निम्नलिखित महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है:
कच्चे माल का प्रबंधन: गुणवत्तापूर्ण कच्चे माल का चयन, उसकी उपलब्धता और भंडारण की तकनीक।
वैज्ञानिक उत्पादन विधियां: आधुनिक और सुरक्षित तकनीकों के माध्यम से अगरबत्ती व साबुन निर्माण की प्रक्रिया।
गुणवत्ता नियंत्रण: बाजार की प्रतिस्पर्धा के अनुरूप उत्पादों की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करना।
पैकेजिंग और ब्रांडिंग: उत्पादों को आकर्षक रूप देना, लेबलिंग करना और एक स्वतंत्र ब्रांड के रूप में स्थापित करना।
लागत और विपणन (Marketing): उत्पाद की निर्माण लागत तय करना, लाभ-हानि का सटीक आकलन करना और स्थानीय बाजारों में बिक्री की रणनीतियां बनाना।
वित्तीय साक्षरता और व्यक्तित्व विकास पर विशेष जोर
संस्थान द्वारा बंदियों को केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाने के लिए वित्तीय और मानसिक रूप से भी तैयार किया जा रहा है। इसके तहत उन्हें निम्नलिखित विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया जा रहा है:
बैंकिंग सेवाएं और ऋण सुविधाएं: बैंक से जुड़ने की प्रक्रिया और व्यवसाय शुरू करने के लिए ऋण प्राप्त करने के तरीके।
सरकारी स्वरोजगार योजनाएं: केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न सब्सिडी और रोजगार योजनाओं की जानकारी।
मानसिक रूपांतरण: प्रशिक्षण के माध्यम से बंदियों में सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, अनुशासन, समय प्रबंधन और टीम भावना (स्वावलंबन) का विकास किया जा रहा है ताकि वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकें।
अधिकारियों के मुख्य वक्तव्य और दृष्टिकोण
“कौशल विकास पर आधारित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों के पुनर्वास की दिशा में अत्यंत प्रभावी पहल है। ऐसे सुधारात्मक कार्यक्रमों से बंदियों को जेल से बाहर निकलने के बाद एक नया और बेहतर जीवन प्रारंभ करने का वास्तविक अवसर मिलता है। इससे वे समाज में एक सकारात्मक और सम्मानजनक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित होंगे।”
— विक्रम गुप्ता, जेलर, जिला जेल सूरजपुर
“वर्तमान दौर में स्वरोजगार ही आत्मनिर्भरता का सबसे सशक्त और प्रभावी माध्यम है। सभी प्रतिभागियों को इस प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाना चाहिए। बैंक और विभिन्न सरकारी योजनाएं हर उस व्यक्ति को आवश्यक वित्तीय व तकनीकी सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो स्वयं का उद्यम स्थापित करना चाहता है।”
— संदीप कुमार, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (LDM)
“ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) का मूल उद्देश्य ही ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को पूरी तरह निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें पैरों पर खड़ा करना है। संस्थान लगातार युवाओं, महिलाओं और विशेष वर्गों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न रोजगारोन्मुखी ट्रेडों में प्रशिक्षण आयोजित करता रहा है। जिला जेल में आयोजित यह कार्यक्रम भी इसी पावन उद्देश्य की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।”
— अशोक कुमार राणा, निदेशक, RSETI
प्रशिक्षण टीम और सक्रिय सहयोग
इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम को धरातल पर उतारने में RSETI की विशेषज्ञ फैकल्टी परमानंद एवं मयंक तिवारी द्वारा बंदियों को सैद्धांतिक (Theoretical) और व्यावहारिक (Practical) दोनों प्रकार का ज्ञान दिया जा रहा है।
इसके साथ ही, कार्यक्रम के सुचारू संचालन और व्यवस्था प्रबंधन में ऑफिस असिस्टेंट अंकित गुप्ता, अजय कुमार, सुनील कुमार सहित RSETI संस्थान और जिला जेल सूरजपुर के अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों का सक्रिय और सराहनीय सहयोग प्राप्त हो रहा है।
निष्कर्ष: कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने बंदियों से इस हुनर को पूरी गंभीरता और समर्पण के साथ सीखने का आह्वान किया। इस पहल को सामूहिक रूप से “कौशल विकास से आत्मनिर्भर भारत” के संकल्प को सिद्ध करने वाला एक बड़ा और प्रेरणादायी कदम माना जा रहा है।

Share This Article
Leave a comment