गंभीर अपराधों की विवेचना में तकनीकी पारदर्शिता और अचूक साक्ष्य संकलन अनिवार्य: सूरजपुर में वृहद न्यायिक व पुलिस कार्यशाला संपन्न

Deshkibaat24
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सूरजपुर ब्यूरो। जिला मुख्यालय स्थित जिला पंचायत के सभाकक्ष में गंभीर अपराधों की विवेचना में गुणात्मक सुधार और साक्ष्य संकलन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस विधिक कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नए कानूनों के तहत अभियोजन प्रक्रिया को दोषमुक्त बनाना और अपराधियों को कड़ी सजा के दायरे में लाकर पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना रहा। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनीता वार्नर द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर अपर जिला व सत्र न्यायाधीश मानवेन्द्र सिंह तथा डीआईजी एवं एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
नए विधिक प्रावधान और डिजिटल साक्ष्यों पर जोर
कार्यशाला के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनीता वार्नर ने स्पष्ट किया कि न्याय प्रणाली की सफलता काफी हद तक पुलिस की प्रारंभिक विवेचना की शुद्धता पर निर्भर करती है। उन्होंने विवेचकों को आगाह किया कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने के क्षण से लेकर न्यायालय में चालान (चार्जशीट) पेश करने तक की पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की प्रक्रियात्मक त्रुटि या खामी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने नए विधिक सुधारों—भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)—के विभिन्न प्रावधानों को रेखांकित करते हुए कहा कि आधुनिक युग में पारंपरिक साक्ष्यों के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्यों को बारीकी और वैज्ञानिक ढंग से एकत्र करना अनिवार्य है। उन्होंने विशेष रूप से यह जानकारी दी कि नए कानून के तहत 7 साल या उससे अधिक की सजा वाले सभी गंभीर अपराधों में फोरेंसिक जांच अनिवार्य कर दी गई है, जिससे साक्ष्य को कानूनी रूप से अचूक बनाया जा सके।
NDPS मामलों में त्रुटिहीन अनुसंधान और चेकलिस्ट का महत्व
विशिष्ट विधिक विमर्श सत्र में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मानवेन्द्र सिंह ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट से जुड़े संवेदनशील मामलों पर अपना व्यावहारिक व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि अक्सर विधिक प्रक्रियाओं के पर्याप्त व्यावहारिक ज्ञान के अभाव में विवेचक अनुसंधान के दौरान छोटी-मोटी तकनीकी चूक कर बैठते हैं, जिसका सीधा लाभ अभियुक्तों को मिल जाता है और वे कानून के शिकंजे से बच निकलते हैं।
मानवेन्द्र सिंह ने एनडीपीएस मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने से लेकर अंतिम जांच रिपोर्ट तैयार करने तक की संपूर्ण प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समझाया। उन्होंने सभी थानों और चौकियों के विवेचकों को सख्त हिदायत दी कि वे एनडीपीएस मामलों की वैधानिक चेकलिस्ट हमेशा अपने साथ रखें, ताकि किसी भी त्वरित कार्रवाई के समय कोई अनिवार्य कानूनी पहलू छूटने न पाए।
पारदर्शिता और तकनीक आधारित पुलिसिंग पर जोर
जिले के डीआईजी और एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर ने कार्यशाला के आयोजक के रूप में उपस्थित समस्त विवेचकों को निर्देशित किया कि न्यायिक अधिकारियों से प्राप्त यह उच्च स्तरीय मार्गदर्शन पुलिस अधिकारियों के विधिक दृष्टिकोण को साफ करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने निर्देश दिए कि इस प्रशिक्षण सत्र से सीखी गई बारीकियों का व्यावहारिक उपयोग धरातल पर अपराध अनुसंधान की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से ई-साक्ष्य प्रणाली के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया ताकि तकनीकी रूप से पारदर्शी और सुदृढ़ साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जा सकें।
अभियोजन पक्ष की ओर से डीडीपी विरेन्द्र लकड़ा और डीपीओ मनोज चतुर्वेदी ने भी नवीन विधिक धाराओं और कोर्ट प्रक्रियाओं से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को साझा किया।
फोरेंसिक एक्सपर्ट्स ने दिए वैज्ञानिक जांच के मंत्र
वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन के तकनीकी सत्र में संयुक्त संचालक एफएसएल आर.के.पैंकरा, कुलदीप कुजूर और डॉ. रसलीन कौर की विशेषज्ञ टीम ने घटनास्थल के वैज्ञानिक प्रबंधन पर महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे फिंगरप्रिंट, डिजिटल फुटप्रिंट, जैविक साक्ष्य और कस्टडी की शृंखला (Chain of Custody) को सुरक्षित रखकर केस को अकाट्य बनाया जा सकता है। कार्यशाला के दौरान उपस्थित विवेचकों ने अनुसंधान के दौरान आने वाली व्यावहारिक और कानूनी समस्याओं को लेकर सीधे न्यायाधीशों से सवाल किए, जिनका मौके पर ही समाधान प्रस्तुत किया गया।
वृहद स्तर पर रही पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल संचालन निरीक्षक जावेद मियादाद द्वारा किया गया। कार्यशाला की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें जिले के लगभग सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और विधिक सलाहकार उपस्थित रहे, जिनमें:
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक: योगेश देवांगन
एडीपीओ: राजेश सिंह, पंकज कुमार, गजेन्द्र प्रताप सिंह, शशांक देशमुख
सीएसपी: बेनार्ड कुजूर
डीएसपी मुख्यालय: महालक्ष्मी कुलदीप
एसडीओपी ओड़गी: राजेश जोशी
एसडीओपी सूरजपुर: अभिषेक पैंकरा
डीएसपी अजाक: रीना नीलम कुजूर
डीएसपी: अनूप एक्का
इनके साथ जिले के समस्त थाना-चौकी प्रभारी और कुल 145 विवेचक इस कार्यशाला में सक्रिय रूप से सम्मिलित हुए ताकि जिले में अपराध विवेचना के स्तर को उच्चतम स्तर पर ले जाया जा सके।

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