अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क पर सरगुजा पुलिस का बड़ा प्रहार: म्यूल बैंक खाता धारक गिरफ्तार, 5 राज्यों से जुड़े तार

Deshkibaat24
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अम्बिकापुर : सरगुजा जिला पुलिस ने देशव्यापी ऑनलाइन साइबर ठगी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने बैंक खातों का दुरुपयोग कर अवैध वित्तीय लेन-देन करने वाले एक गिरोह (म्यूल अकाउंट नेटवर्क) का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य खाताधारक को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपी के खाते का इस्तेमाल देश के पांच अलग-अलग राज्यों—गुजरात, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और तमिलनाडु में भोले-भाले लोगों से लाखों रुपये की ऑनलाइन ठगी करने के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा (जेल) में भेज दिया है।
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर विशेष अभियान
पुलिस मुख्यालय (तकनीकी सेवाएं) नवा रायपुर द्वारा राज्य में सक्रिय अवैध म्यूल अकाउंट्स (किराए के बैंक खातों) के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। इन निर्देशों के परिप्रेक्ष्य में डीआईजी एवं एसएसपी राजेश कुमार अग्रवाल (पुलिस अधीक्षक सरगुजा) के मार्गदर्शन में थानों में दर्ज लंबित मामलों और संदिग्ध खातों की धरपकड़ के लिए एक विशेष अभियान चलाया गया। इसी कड़ी में थाना गांधीनगर पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड्स के आधार पर इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
ऐसे हुआ देशव्यापी घोटाले का भंडाफोड़
पुलिस के अनुसार, तकनीकी सेल से प्राप्त संदिग्ध खातों की सूची के विश्लेषण के दौरान आईडीबीआई (IDBI) बैंक के खाता क्रमांक 0700104000343329 पर संदेह हुआ। जब गांधीनगर थाना पुलिस ने संबंधित बैंक शाखा से इसके ‘नो योर कस्टमर’ (केवाईसी) दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट प्राप्त किए, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। यह खाता लक्ष्मण नागेश (पिता: भगलू राम, निवासी: मकान नंबर 67, प्राथमिक स्कूल के पास, गुजरवार, अम्बिकापुर, जिला: सरगुजा) के नाम पर पंजीकृत पाया गया।
जांच में पता चला कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से इस विशेष खाते के विरुद्ध देश के पांच बड़े राज्यों से ऑनलाइन साइबर धोखाधड़ी की कई गंभीर शिकायतें दर्ज थीं। इन दर्ज शिकायतों के प्रारंभिक मिलान से यह स्पष्ट हुआ कि साइबर ठगों द्वारा अलग-अलग राज्यों के पीड़ितों से कुल 5,73,999 रुपये की राशि इसी खाते में ट्रांसफर करवाई गई और बाद में उसे आहरित (विथड्रॉ) कर लिया गया। इसी आधार पर थाना गांधीनगर में अपराध क्रमांक 248/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(4), 318(4), और 3(5) के तहत मामला पंजीकृत किया गया।
महज 23 दिनों में 33 लाख रुपये का संदिग्ध टर्नओवर
गांधीनगर पुलिस द्वारा जब खाते के विस्तृत बैंक स्टेटमेंट का गहन ऑडिट किया गया, तो इसमें एक और बड़ा वित्तीय अपराध सामने आया। मात्र 23 दिनों के भीतर—यानी दिनांक 21 सितंबर 2024 से 14 अक्टूबर 2024 के मध्य—इस खाते में देश के विभिन्न हिस्सों से कुल 33,15,010 रुपये जमा किए गए थे। यह राशि खाते में रुकती नहीं थी, बल्कि जमा होते ही लगातार अन्य संदिग्ध बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। इस भारी-भरकम ट्रांजैक्शन से यह साफ हो गया कि यह खाता पूरी तरह से साइबर अपराधियों की ‘ब्लैक मनी’ को ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
आरोपी का कबूलनामा: 10 हजार के लालच में बेचा ईमान
ठोस सबूत मिलने के बाद थाना गांधीनगर पुलिस ने खाताधारक लक्ष्मण नागेश को तलब किया और कड़ाई से पूछताछ की। पुलिस के सामने आरोपी ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि एक अज्ञात व्यक्ति ने उससे संपर्क किया और कहा कि वह ऑनलाइन गेम में रुपयों के लेनदेन के लिए एक बैंक खाते की तलाश में है। उसने खाते में होने वाले लाभ में से हिस्सेदारी देने का वादा किया था। उसके झांसे में आकर लक्ष्मण नागेश ने आईडीबीआई बैंक की अम्बिकापुर शाखा में खाता खुलवाया। इसके तुरंत बाद, उसने उस व्यक्ति से 10,000 रुपये नगद लिए और अपने खाते की मूल पासबुक, एटीएम कार्ड और खाते से लिंक सिम कार्ड उसे सौंप दिए।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना और अपराध में प्रयुक्त मोबाइल फोन और संबंधित सिम कार्ड को गवाहों के समक्ष विधिवत जब्त कर लिया है। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
इस टीम को मिली बड़ी कामयाबी
इस अंधेरे अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करने और आरोपी को दबोचने में गांधीनगर पुलिस की टीम ने अत्यंत सराहनीय भूमिका निभाई। इस सफल कार्रवाई में मुख्य रूप से गांधीनगर थाना प्रभारी और निरीक्षक प्रवीण कुमार द्विवेदी, उपनिरीक्षक दिलीप दुबे, आरक्षक अरविंद उपाध्याय, आरक्षक रिषभ सिंह और आरक्षक मृत सिंह सहित थाना स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
🚨 पुलिस की आम जनता को विशेष चेतावनी:
खाता किराए पर न दें: पैसों या मामूली कमीशन के लालच में कभी भी किसी अज्ञात व्यक्ति को अपना बैंक खाता, पासबुक, एटीएम कार्ड या सिम कार्ड किराए पर या इस्तेमाल के लिए न दें।
आप भी बन सकते हैं अपराधी: ऐसा करना आपको अनजाने में एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर अपराध का भागीदार बना देता है।
कड़ी कानूनी कार्रवाई: कानूनन ऐसे मामलों में सीधे खाताधारक (म्यूल अकाउंट होल्डर) को जिम्मेदार माना जाता है और देश भर की पुलिस आपके खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई कर जेल भेज सकती है।

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