सूरजपुर : जिले के जयनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक 14 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ हुए दुराचार के मामले में न्यायपालिका ने कड़ा रुख अपनाया है। फास्ट ट्रैक विशेष पॉक्सो न्यायालय ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल द्वारा सुनाया गया यह फैसला समाज में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
घटना का विवरण: नर्सरी में दिया था वारदात को अंजाम
यह हृदयविदारक घटना 24 मार्च 2025 की है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पीड़िता की माँ ने 25 मार्च 2025 को चौकी लटोरी में मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के मुताबिक, घटना के दिन दोपहर के समय 14 वर्षीय पीड़िता शौच के लिए पास ही स्थित एक नर्सरी की ओर गई थी। इसी दौरान पीड़िता की भतीजी ने दौड़ते हुए घर आकर सूचना दी कि आरोपी शनि पैंकरा ने पीड़िता का मुँह दबा रखा है और उसे जबरन नर्सरी के अंदर खींचकर ले जा रहा है। सूचना मिलते ही जब पीड़िता की माँ और भतीजी मौके पर पहुँचे, तो उन्होंने पीड़िता को वहां से रोते हुए आते देखा। पीड़िता ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि शनि पैंकरा ने उसे जान से मारने की धमकी दी और विरोध करने के बावजूद उसके साथ जबरदस्ती दुराचार किया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज की और आरोपी शनि पैंकरा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस प्रशासन द्वारा मामले में त्वरित जांच सुनिश्चित की गई:
मेडिकल परीक्षण: घटना के तुरंत बाद पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया।
चार्जशीट: महज 20 दिनों के भीतर, 15 अप्रैल 2025 को पुलिस ने न्यायालय में विस्तृत आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया।
साक्ष्य: अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के समक्ष पीड़िता के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट और गवाहों के ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए।
इन तमाम सबूतों के आधार पर विशेष न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल ने सोमवार को अपना फैसला सुरक्षित रखा और आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा अर्थदंड से दंडित किया।
कानूनी जागरूकता और रोकथाम के प्रयास
इस फैसले के साथ ही जिला प्रशासन और विधिक सेवा प्राधिकरण ने समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के मार्गदर्शन में वर्तमान में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अभियान चलाए जा रहे हैं।
जागरूकता अभियान के मुख्य बिंदु:
बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर अभिभावकों की निरंतर निगरानी।
सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के सुरक्षित उपयोग के बारे में बच्चों को शिक्षित करना।
स्कूलों और ग्राम पंचायतों में आयोजित होने वाले कानूनी साक्षरता शिविर के माध्यम से पॉक्सो एक्ट की जानकारी देना।
नाबालिग से दुराचार के मामले में ऐतिहासिक फैसला: दोषी शनि पैंकरा को 20 वर्ष का कठोर कारावास
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