
बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत आरा में ईद मिलादुन्नबी सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम का पर्व बेहद ही अज़ीमुश्शान और रूहानी माहौल में मनाया गया। इस दौरान आयोजित विशेष प्रोग्राम में समूचे क्षेत्र से सैकड़ों की संख्या में अकीदतमंदों ने भाग लिया और पूरे अदब व एहतराम के साथ जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का त्यौहार मनाया।
आयोजन के दौरान मंच से मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए मौलाना शमशाद रज़ा क़ादरी साहब ने हुज़ूर नबी-ए-करीम सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम की ज़िंदगी, उनके मुबारक अख़लाक़ और इंसानियत को दिए गए पैग़ाम पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पैग़ंबरे इस्लाम का आगमन पूरी दुनिया के लिए रहमत बनकर हुआ है।
मौलाना शमशाद रज़ा क़ादरी साहब ने तत्कालीन ऐतिहासिक परिस्थितियों का ज़िक्र करते हुए कहा, “जिस दौर में बेटियों को पैदा होते ही ज़िंदा दफन कर दिया जाता था, उस दौर में जब सरकार-ए-दो आलम दुनिया में तशरीफ़ लाए, तो उन्होंने इस अमानवीय ज़ुल्म को हमेशा-हमेशा के लिए खत्म कराया। आपने समाज में औरतों को इज़्ज़त व बराबरी का दर्जा दिया, बेटियों को रहमत बताया और इंसानियत को आपसी मोहब्बत का पैग़ाम दिया।”
आगे उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि केवल खुशियां मनाना ही काफी नहीं है, बल्कि आज हमें हुज़ूर की सीरत (जीवन चरित्र) को अपनी व्यावहारिक ज़िंदगी में उतारने की सख्त ज़रूरत है। समाज में आपसी भाईचारा, शांति, सह अस्तित्व और मोहब्बत कायम रखना ही ईद मिलादुन्नबी का सच्चा संदेश है।
इस रूहानी और भव्य आयोजन में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मास्टर हाजी शमीम मंसूरी, अब्दुल फत्तह अंसारी, मोहम्मद इमाम अली, मोहम्मद रिज़वान, मास्टर हाजी वाइजुल हक़ अंसारी, उपसरपंच हसीब अंसारी, अब्दुल रऊफ मंसूरी, मास्टर हाजी अमीन मंसूरी और उपसरपंच अज़ीम अंसारी उपस्थित रहे। इनके अलावा बड़ी तादाद में नौजवानों, बुज़ुर्गों और बच्चों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में मुल्क में अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, तरक्की और खुशहाली के लिए बारगाह-ए-इलाही में विशेष दुआ मांगी गई।

