सूरजपुर : प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान के लिए शासन से पहली या दूसरी किस्त की राशि बैंक खातों में प्राप्त करने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू न करने वाले और काम को बीच में ही अधूरा छोड़ने वाले हितग्राहियों के खिलाफ प्रशासन अब पूरी तरह सख्त हो गया है। जिला प्रशासन के निर्देश पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) प्रतापपुर द्वारा ऐसे लापरवाह हितग्राहियों को सीधे एसडीएम कार्यालय में तलब कर कड़ी फटकार लगाई गई और योजना के मूल उद्देश्यों को समझाते हुए जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए।
इस विशेष सुनवाई के दौरान कुल 10 ग्राम पंचायतों के 66 हितग्राही एसडीएम कोर्ट में पेश हुए। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जब तक मकान का निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न नहीं हो जाता, तब तक इन हितग्राहियों को नियमित रूप से हर पेशी पर कार्यालय में उपस्थित होना पड़ेगा।
इन 10 ग्राम पंचायतों के हितग्राहियों पर गिरी गाज
प्रतापपुर एसडीएम कार्यालय में हुई इस सुनवाई के दौरान क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न गांवों की समीक्षा की गई। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित ग्राम पंचायतों के डिफाल्टर हितग्राहियों को नोटिस देकर बुलाया गया था:
केवरा, पार्वतीपुर और कनकनगर
सिलफिली, सिंघरा और भेड़िया
सिलौटा, सेमराकला, मतिगढ़ा और खैराडीह
एक-एक हितग्राही से ली गई जानकारी, अगली पेशी पर लाने होंगे फोटो
सुनवाई के दौरान एसडीएम ने कोर्ट में उपस्थित सभी 66 हितग्राहियों से एक-एक कर उनके आवास निर्माण की वास्तविक स्थिति, काम रुकने का कारण और अब तक खर्च की गई राशि का विवरण लिया। पूछताछ के बाद एसडीएम ने दो-टूक शब्दों में निर्देश जारी किए:
तत्काल शुरू करें काम: जिन लोगों ने बैंक खाते में राशि आने के बाद भी नींव तक नहीं खोदी है, वे तत्काल निर्माण कार्य प्रारंभ करें।
अगली तारीख तक आवास पूर्ण करें: जिनका काम किन्हीं कारणों से रुका हुआ है या निर्माणाधीन है, वे अगली पेशी की तारीख आने से पहले हर हाल में छत ढलाई और फिनिशिंग का काम पूरा करा लें।
तस्वीरों से होगा भौतिक सत्यापन: आगामी सुनवाई में सभी हितग्राहियों को अनिवार्य रूप से अपने निर्मित या प्रगतिधीन आवास की वर्तमान तस्वीरें (फोटोज) साथ लेकर आना होगा। इन तस्वीरों का मिलान संबंधित मैदानी अधिकारियों और कर्मचारियों के जमीनी सत्यापन (Physical Verification) से किया जाएगा, ताकि कोई धोखाधड़ी न हो सके।
“राशि का अन्यत्र उपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं”
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत सीईओ विजेन्द्र सिंह पाटले ने इस प्रशासनिक कार्रवाई पर अपना कड़ा रुख साझा किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना का एकमात्र लक्ष्य हर उस गरीब और पात्र परिवार को खुद का पक्का आशियाना देना है जो कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं।
विजेन्द्र सिंह पाटले ने कहा:
“शासन द्वारा गरीब परिवारों के कल्याण के लिए राशि जारी की जाती है। ऐसे में योजना का पैसा बैंक खाते में आने के बाद भी निर्माण कार्य में लापरवाही बरतना या उस सरकारी राशि का उपयोग घर न बनाकर किसी अन्य निजी काम में कर लेना बेहद गंभीर मामला है। इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। प्रशासन लगातार ब्लॉक और पंचायत स्तर पर इसकी समीक्षा कर रहा है ताकि हर स्वीकृत मकान समय पर पूरा हो और वास्तविक गरीबों को उनका हक मिल सके।”
प्रशासन की इस सख्ती का असर
एसडीएम कार्यालय की इस औचक और सख्त कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य लापरवाह हितग्राहियों और काम की निगरानी करने वाले रोजगार सहायकों व सचिवों में भी हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस कवायद का उद्देश्य हितग्राहियों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें अपने स्वयं के मकान को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित और पाबंद करना है। यदि इसके बाद भी हितग्राही कार्य में रुचि नहीं लेते हैं, तो प्रशासन आगे चलकर राशि की वसूली (आरआरसी) और कानूनी कार्रवाई जैसे कड़े कदम भी उठा सकता है।
सरकारी पैसा लेकर नहीं बनाया मकान: सूरजपुर में 66 पीएम आवास हितग्राहियों की एसडीएम कोर्ट में पेशी, अगली तारीख तक काम पूरा करने का अल्टीमेटम
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