अल-नीनो का खतरा: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ली हाई-लेवल बैठक, दलहन-तिलहन और फसल विविधीकरण पर दिया जोर

Deshkibaat24
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बलरामपुर : जिले में अल-नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष मानसून के कमजोर रहने और कम बारिश की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। किसानों को संभावित नुकसान से बचाने और सूखे जैसी स्थिति से निपटने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक ली। इस बैठक में अल-नीनो से प्रभावित होने वाले संभावित राज्यों और जिलों की तैयारियों की गहन समीक्षा की गई।
बैठक में जमीनी स्तर के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे पारंपरिक कृषि के बजाय फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा दें और किसानों को कम पानी वाली फसलों की ओर मोड़ें।
जिला प्रशासन और कृषि विभाग हुए शामिल
इस राष्ट्रव्यापी वर्चुअल समीक्षा बैठक में बलरामपुर जिले से कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी सहित कृषि, उद्यानिकी और अन्य संबंधित विभागों के आला अधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। बैठक के दौरान बलरामपुर सहित देश के अन्य संवेदनशील जिलों में कम वर्षा की स्थिति में फसल सुरक्षा, जल प्रबंधन और वैकल्पिक कृषि रणनीतियों (Contingency Crop Plan) पर बिंदुवार विस्तार से चर्चा की गई।
कम पानी और कम समय वाली फसलों पर रहेगा फोकस
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए पारंपरिक और अधिक पानी खपत वाली फसलों के बजाय वैकल्पिक फसलों के रकबे (बुआई क्षेत्र) को बढ़ाया जाए। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित रणनीतियों पर जोर दिया गया:
मोटे अनाज और दलहन-तिलहन को बढ़ावा: किसानों को मक्का, कोदो, कुटकी और रागी जैसे पोषक व कम पानी वाले मोटे अनाजों (Millets) के साथ-साथ दलहनी (दालें) और तिलहनी फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया है।
अंतरवर्ती खेती (Intercropping): मुख्य फसलों के बीच में दलहन और तिलहन को अंतरवर्ती फसल के रूप में लगाने की सलाह दी गई है, ताकि यदि एक फसल प्रभावित हो, तो दूसरी फसल से किसानों की लागत निकल सके।
कम अवधि वाली धान की किस्में: धान की उन किस्मों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं जो कम समय में और कम पानी में पककर तैयार हो जाती हैं।
किसानों को मिलेगा तकनीकी और आर्थिक सुरक्षा कवच
सरकार ने प्रतिकूल मौसम में किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया है, ताकि अधिक से अधिक किसान समय रहते अपनी फसलों का बीमा करा सकें। इसके साथ ही कृषि विभाग के माध्यम से हर जिले में गुणवत्तापूर्ण और उन्नत बीजों की अग्रिम उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
बैठक के अंत में सभी जिला कलेक्टरों और कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे ग्रामीण स्तर पर किसान चौपाल और तकनीकी मार्गदर्शन शिविर आयोजित करें। इसके जरिए किसानों को मौसम के पूर्वानुमान और वैकल्पिक खेती की पूरी जानकारी समय पर दी जाएगी, ताकि अल-नीनो के किसी भी प्रतिकूल प्रभाव से देश के अन्नदाता और कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखा जा सके।

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