
सूरजपुर : राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सूरजपुर जिले में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के अवसर पर आज ‘शाला प्रवेशोत्सव’ का आयोजन अत्यंत उत्साह, उमंग और गरिमामय वातावरण में किया गया। जिले के समस्त शासकीय विद्यालयों में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हर बच्चे को औपचारिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना, समाज में शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक और प्रेरणादायक माहौल तैयार करना तथा स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाना रहा।
लंबे अवकाश के बाद खुले स्कूलों के पहले दिन बच्चों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। शाला परिसरों को विशेष रूप से सजाया गया था, जो बच्चों की किलकारियों और मुस्कान से गूंज उठे। इस अवसर पर शिक्षकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और गणमान्य नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने इस उत्सव को और भी खास बना दिया।
नवप्रवेशी बच्चों का आत्मीय स्वागत और सामग्री वितरण
कार्यक्रम के दौरान स्कूलों में पहली बार कदम रखने वाले नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं का शिक्षकों और अतिथियों द्वारा पुष्प भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। इसके साथ ही, बच्चों को राज्य शासन की योजना के तहत निशुल्क गणवेश (यूनिफॉर्म) और नई पाठ्यपुस्तकें वितरित की गईं। नई किताबें और स्कूल ड्रेस पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे।
यह विशेष आयोजन जिले के विभिन्न अंचलों में स्थित स्कूलों में पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
सूरजपुर: माध्यमिक शाला ऊंचड़ी
प्रतापपुर: कन्या माध्यमिक शाला और उच्चतर माध्यमिक शाला लोलकी
रामानुजनगर: माध्यमिक शाला और प्राथमिक शाला बकना
ओडगी: उच्चतर माध्यमिक शाला लांजीत
प्रेमनगर: प्राथमिक शाला कनकपुर
कलेक्टर रेना जमील ने दीं शुभकामनाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर दिया जोर
इस महत्वपूर्ण अवसर पर सूरजपुर की कलेक्टर रेना जमील ने जिले के सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को नए शैक्षणिक सत्र की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने शिक्षा के मूल उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि विद्यालय केवल किताबी ज्ञान या पढ़ाई का केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये बच्चों के सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण की असली आधारशिला हैं।
कलेक्टर ने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे प्रतिदिन और नियमित रूप से स्कूल आएं, पूरी एकाग्रता के साथ अध्ययन करें और पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा अन्य सह-पाठ्यक्रम (Co-curricular) गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से भाग लें। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि बच्चों में अनुशासन, आपसी सहयोग, मित्रता और सामूहिक रूप से अध्ययन करने की भावना विकसित करना भी आधुनिक शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा है। उन्होंने विद्यार्थियों को ऊंचे सपने देखने और उन्हें कड़ी मेहनत के बल पर साकार करने के लिए प्रेरित किया।
अभिभावकों के लिए संदेश: डिजिटल भटकाव से बच्चों को बचाएं
अभिभावकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कलेक्टर ने कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए माता-पिता और शिक्षकों के बीच निरंतर समन्वय (तालमेल) होना अनिवार्य है। उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में व्यक्तिगत रुचि लें, नियमित रूप से स्कूल जाकर शिक्षकों से संवाद स्थापित करें और बच्चों की शैक्षणिक प्रगति की सतत निगरानी करें।
इसके साथ ही उन्होंने आज के डिजिटल युग की चुनौतियों का जिक्र करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी बहुत सी सामग्रियां मौजूद हैं जो बच्चों को उनके जीवन की सही दिशा से भटका सकती हैं। कलेक्टर ने शिक्षकों और अभिभावकों को मिलकर एक विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया, जिसके तहत बच्चों को इन डिजिटल भटकावों से दूर रखा जा सके और उन्हें तकनीक व डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के केवल सकारात्मक एवं रचनात्मक उपयोग के लिए ही प्रोत्साहित किया जाए।
बोर्ड परीक्षाओं के लिए अभी से सुनियोजित रणनीति बनाने की सलाह
आगामी बोर्ड परीक्षाओं में सम्मिलित होने वाले विद्यार्थियों को कलेक्टर ने सत्र के पहले दिन से ही सजग रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम कभी भी आखिरी समय की पढ़ाई से नहीं, बल्कि साल भर के निरंतर अध्ययन और नियमित अभ्यास से ही संभव हैं। इसलिए छात्र अभी से अपनी सुनियोजित तैयारी शुरू कर दें। उन्होंने पूरा विश्वास जताया कि जिले के सभी स्कूल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लक्ष्यों को प्राप्त करेंगे और आगामी परीक्षाओं में जिले का नाम रोशन करेंगे।
यह शाला प्रवेशोत्सव न केवल बच्चों के स्कूल लौटने का उत्सव रहा, बल्कि इसने पूरे सूरजपुर जिले में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, स्कूलों में शत्-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने और शिक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ व गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में एक ठोस कदम के रूप में कार्य किया है।

